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________________ ९३४ प्रमङ्कर ( भी ) सौधर्मस्वर्गका एक पटल ६।४७ प्रमङ्करा ( भी ) विदेहकी एक नगरी ५।२५९ प्रभञ्जन (व्य ) एक विद्याधर २२।१०४ प्रमञ्जन ( भी ) मानुषोत्तर पर्वत का एक कूट ५६१० प्रभञ्जन ( 87 ) मानुषोत्तर के प्रभंजन कूटपर रहनेवाला देव ५।६१० प्रमा (भी) सौधर्म स्वर्गका एक पटल ६।४७ प्रभावती (उप) जयकुमारकी भवान्तरकी स्त्री १२।११ प्रभावती (य) वि. द. श्रेणी के राजा गन्धार और पृथिवीकी पुत्री २०१७ प्रभावती (व्य ) भगवान् स्त्री मुनिसुव्रतनाथकी १६।५५ प्रमास (व्य ) धातकीखण्ड द्वीपका रक्षक देव ५६३८ प्रभास ( प ) भगवान् महावोरका एक गणधर ३।४३ प्रमाला ( भी ) एक वापिका ५७/३५ प्रमामण्डल (पा) भगवान्का एक प्रातिहार्य ३।३४ प्रभावती (व्य) वसुदेवकी स्त्री ११८६ प्रभुशक्ति राजाओं की तीन शक्तियों में से एक शक्ति ८/२०१ = प्रभूततेज (व्य) शशीका पुत्र एक राजा १३९ प्रमोदव (व्य) भविष्यत्कालसम्बन्धी तीर्थंकरका नाम ६०.५५९ Jain Education International हरिवंशपुराण प्रमत्तसंयत (पा) छठा गुण स्थान ३।९० आगामी रुद्र प्रमद (व्य ) ६०।५७१ प्रमदा ( भो ) (भौ) समवसरणकी नाट्यशाला ५७/९३ प्रमाणपद (पा) आठ अक्षरका एक प्रमाणपद होता है १०।२२ प्रमाण (पा) उत्सेधांगुल से पांच सौ गुना बड़ा अंगुल ७१४२ प्रमाद (पा) ४ कषाय, ४ विकथा, ५ इन्द्रियोंके विषय १ निद्रा १ स्नेह ये १५ प्रमाद हैं ५८।१९२ प्रमादाचरित (पा) अनर्थदण्डका एक भेद ५८।१४६ = प्रमोद (पा) एक भावना ५८।१२५ प्रवाल ( भी ) रत्नप्रभा पृथिवीके सरभाग के १६ पटलोंमेंसे सातवाँ पटल ४/५३ प्रवीचार मैथुन ३।१६२ प्रवेशन (पा) तालगत गान्धर्वका एक भेद १९।१५० प्रशान्ति (व्य ) एक राजा ४५/१९ प्रश्नव्याकरणाङ्ग (पा) श्रुतज्ञानका एक भेद १०४३ इनकीर्ति (व्य) आगामी तीर्थ कर ६०।५५९ अष्टक ( भी ) सौधर्म स्वर्गका एक पटल ६।४७ प्रसेनजित् (व्य) एक कुलकर ७।१६६ प्रहारसंक्रामिणी (व्य) एक विद्या २२।७० महाद (व्य) उज्जयिनीके राजा For Private & Personal Use Only श्रीधर्माका २०१४ प्राण (पा) व्यवहारकालका एक भेद ७।१९ प्राणत ( भी ) तेरहवाँ स्वर्ग एक मन्त्री ३।१५५ प्राणत ( भी ) ग्रागत स्वर्गका इन्द्रक ६।५१ प्राणावायपूर्व (पा)का एक भेद २।९९ प्रातिहार्य (पा) तीर्थंकरके सम वसरणमें प्रकट होनेवाले अशोक वृक्ष आदि आठ प्रातिहार्य ३ | ३९ प्रायोतिष (भी) एक देश १११६८ प्राभूत (पा) ज्ञानका भेद १०।१३ प्राभृतसमास (पा) श्रुतज्ञानका भेद १०११३ प्राभृतप्राभृत (पा) श्रुतज्ञानका भेद १०।१३ प्राभृतप्राभृतसमास (पा) भुत ज्ञानका भेद १०।१३ प्रायोपगमन (पा) संन्यासमरणका एक भेद ३४।४२ प्रासाद = महल २३/१ प्रास्थाल (भी) एक देश ११६७ प्रियकारिणी (थ्य) राजा सिद्धार्थ की स्त्रो भगवन् महावीरकी माता २।२१ प्रियङ्गुलविका (व्य) जिनदास सेठकी पनिहारिन ३३॥५० वयसुन्दरी (व्य) श्रावस्ती नगरीके राजा एणीपुत्रकी कन्या २८/६ प्रियदर्शन (व्य ) धातकीखण्ड द्वीपका रक्षक देव ५६३८ प्रियदर्शन ( भी ) सुमेरका एक नाम ५।३७४ www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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