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________________ पूर्णभद्र (भौ) विजयार्धपर्वतका एक कूट ५।२६ पूर्णमद्र (व्य) अयोध्याके समुद्र दत्त सेठका पुत्र ४३।१४९ पूर्णमद्र (व्य) एक यक्षका नाम ५।५०१ पूर्णचन्द्र (व्य) आगामी बलभद्र ६०१५६८ पूर्णप्रम (व्य) इक्षुवर द्वीपका रक्षक देव ५।६४३ पूर्णचन्द्र (व्य) रामदत्ताका पुत्र, सिंहचन्द्रका अनुज २७१४७ पूर्णमद्रकूट ( भौ) ऐराक्तके विजयाध पर्वतका एक कूट ५।१११ पूर्णभद्र कूट ( भौ) माल्यवान् __ पर्वतका एक कूट ५१२२० पूर्ण (भौ) एक वापिका ५८।७३ पूर्व (पा) श्रुतज्ञानका भेद । १०।१३ पूर्व (पा) चौरासी लाख पूर्वांग का एक पूर्व होता है७।२५ पूर्वगत (पा) दृष्टिवाद नामक बारहवें अंगका एक भेद २१९६ पूर्वविदेहफूट (भौ)नील पर्वतका एक कूट ५।९९ पूर्वपक्ष = शंकापक्ष २१११३६ पूर्वसमास (पा) श्रुतज्ञानका भेद १०।१३ पूर्वाङ्ग (पा) चौरासी लाख वर्षोंका एक पूर्वांग होता है ७।२४ पूर्वान्त (पा) आग्रायणीय पूर्वकी एक वस्तु १०७८ पृथक्त्ववितर्कवीचार(पा)शक्ल ध्यानका एक भेद ५६।५४ पृथिवी (व्य) एक दिक्कुमारी देवी ८।११० शब्दानुक्रमणिका पृथिवी (व्य) वि. द. श्रेणी गान्धारदेशके गन्धसमृद्ध नगरके राजा गान्धारकी स्त्री ३०७ पृथिवीकाय (पा)एकेन्द्रियजीवों का एक भेद, मिट्टी पाषाण आदि रूप ३११२१ पृथु (व्य) एक राजा ४५।१४ पैशुन्यभाषा (पा) एक भाषाका भेद १०॥९३ पोदनपुर (भो)एक नगर२७१५५ पौण्ड (भौ) एक देश ११।६८ पौण्ड (व्य) एक राजा ३१।२८ पौण्ड (व्य) वसुदेवका पुत्र ४८१५९ पौण्ड़ा ( व्य) वसुदेवकी स्त्री ४८।५९ पौरवी (पा) एक मूर्च्छनाका भेद १९।१६३ पौलोम (व्य) राजा पुलोमका पुत्र १७।२५ प्रकाम (व्य) आगामी रुद्र ६०१५७१ प्रकीर्णक (पा) अंगबाह्यश्रुतका भेद १०।१२५ प्रकृतिधुति (व्य) एक राजा ५०।१२४ प्रकृति (पा) आग्रायणीयपूर्वको पंचमवस्तुके बीस प्राभृतोंमें-से कर्मप्रकृति प्राभृतके चौबीस अनुयोग द्वारोंमें एक अनुयोगद्वार १०१८२ प्रक्रम (पा) कर्मप्रकृति वस्तुका एक अनुयोगद्वार १०।८३ प्रचण्डवाहन (व्य) त्रिशृंग नगरका राजा ४५।९६ प्रचला (पा) दर्शनावरणका भेद ५६।९७ प्रचला-प्रचला (पा)दर्शनावरण कर्मका एक भेद ५६।९१ ९३३ प्रच्छाल (भी) एक देश ३॥६ प्रजाग (प्रयाग) (भौ) भगवान् __ ऋषभदेवका दीक्षास्थान ९।९६ प्रजापति (व्य) भगवान् ऋषभ देवका एक गणधर १२१६५ प्रज्ञप्ति = एक विद्या २७।१३१ प्रणिधान्या(व्य)एक दिक्कूमारी देवी ८।१०८ प्रणिधि (व्य) एक देवी ३८.३३ प्रतिपत्तिसमास (पा) श्रुत ज्ञानका भेद १०।१२ प्रतिष्ठापनिका (पा) एक सीमित निर्जन्तु स्थानमें मलमूत्र छोड़ना २।१२६ प्रतिष्टित(व्य)एक राजा ४५।१२ प्रतिसर (व्य) एक राजा ४५।२९ प्रतीहारी =द्वारपालिनी २३३१ प्रतीत्य सत्य (पा) सत्यवचन का एक भेद १०१०१ प्रत्याख्यान पूर्व (पा) द्वादशांग का एक भेद २१९९ प्रत्येक (पा) नामकर्मका एक भेद ५६।१०४ प्रथमानुयोग (पा) द्वादशांगका एक भेद २१९६ प्रदीपाङ्ग (भौ) एक प्रकारका कल्पवृक्ष ७८० प्रदेश (पा) आकाशद्रव्यका सबसे छोटा भाग ७।१७ प्रदोष (पा) ज्ञानावरण और दर्शनावरणका आस्रव ५८९२ प्रभुम्न (व्य) श्रीकृष्ण-रुक्मिणी__ का पुत्र १११०० प्रद्युम्न (व्य) श्रीकृष्ण-रुक्मिणी __ का पुत्र ४३१६१ प्रबोध (भो) एक स्तूपका नाम ५७११०६ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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