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________________ ९२४ हरिवंशपुराणे देविला (व्य) जयदेवकी पत्नी ६०११०९ देशसत्य (पा) दश प्रकारके सत्यों में से एक सत्य १०११०५ देशावधि (पा) अवधिज्ञानका एक भेद १०।१५२ दैवकेय = देवकीका पुत्र श्रीकृष्ण ३५२५ दोष = भुजा ३६।२२ दोषत्रय = राग, द्वेष, मोह२।८९ द्युति (व्य) शूरदत्तकी स्त्री ३३।९९ धुमणि = सूर्य ४।६४ द्युम्नधारा = रत्नधारा २१४५ द्योतिः (भौ, रत्नप्रभाके खरभाग का आठवां पटल ४/५३ द्योतितस्य तथा तस्य ११५३ द्रव्य (पा) उत्पाद, व्यय, ध्रौव्य से युक्त अथवा गुण और पर्यायसे युक्त जीवादि छह द्रव्य १११ द्रव्यादि (पा) द्रव्य, क्षेत्र, काल, भाव १११ द्रव्यार्थिक नय (पा) सामान्य ग्राही नय ५८।४२ द्रुतम् = शीघ्र ही ५११४२ दुपद (व्य) माकन्दीका राजा ४५।१२१ द्रुपद (व्य) एक राज ५०।८१ दुम (व्य) जरासंघका पुत्र ५२॥३० दुमपेक (व्य) एक मुनिराज ३३।१४९ द्रुमसेन (व्य) जरासंधका पुत्र ५२।३० द्रुमसेन (व्य) सिंहलके राजा इलक्ष्णरोमका सेनापति ४४॥२३ द्रोण (व्य) द्रोणाचार्य ४५४१ द्रोणाचार्य (व्य) विद्रावणका पुत्र ४५१४७ द्रोणामुख (पा) नदीके तटवर्ती नगर २।३ द्रौपदी (व्य) माकन्दीके राजा द्रुपदकी पुत्री ४५।१२२ । द्वादश विभाग -समवसरणकी बारह सभाग २१६६ द्विकावळीविधि = एक उपवास विधि ३४।६८ द्विपर्वा = एक विद्या २२।६७ द्विपृष्ठ (व्य) दूसरा नारायण ६०।२८८ द्विपृष्ठ (व्य) आगामी नारायण ६०१५६७ द्विविधकर्मवन्ध = शुभ-अशुभ कर्मबन्ध २।१०९ ।। द्विशतग्रीव (व्य) वलि प्रति नारायणके वंशमें उत्पन्न हुआ एक राजा २५।३६ द्वीप (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।३० द्वीपकुमार = भवनवासी देवोंका एक भेद ४।६३ द्वीपसमुद्र प्रज्ञप्ति (पा) परिकर्म श्रुतका भेद १०॥६२ द्वीपायन (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।३० द्वीपायनमुनि (व्य) द्वारिका दाहमें कारणभूत एक मुनि ११११८ [ ध] धनञ्जय (व्य) अर्जुन ५०१९४ धनन्जय (व्य) मेघपुरका राजा ३३।१३५ धनन्जय (व्य, धरणका पुत्र ४८।५० धनन्जय व्य) विनमिका पुत्र २२११०४ धनञ्जय (भौ) वि. उ. नगरी २२१८६ धनञ्जय (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३६ धनदेव (व्य) भगवान् ऋषभ देवका गणधर १२।५६ धनदेव (व्य) इभ्यपुरका सेठ ६०।९५ धनद (व्य) कुबेर ५५।१ धनदत्त (व्य) एक सेठका नाम १८।११३ धनदेव (व्य) एक वैश्य ४६।५० धराधर (भौ) वि. द. नगरी २२।९७ धनपाल (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३२ धनपाल (व्य) धनदत्त और नन्दयशाका पुत्र १८।११४ धनमित्र (व्य) धनदत्त सेठकी स्त्री नन्दयशाका पुत्र १८।१२० धमवाहिक (व्य) ऋषभदेवका गणधर १२०६५ धनधान्य प्रमाणातिक्रम (पा) परिग्रह परिमाणाणुव्रतके अतिचार ५८।१७६ धनश्री (व्य) स्त्री ६४।६ धनश्री (व्य) मेघपुरके राजा धनंजय और रानी सर्वश्री की पुत्री ३३।१३५ धनुष् (पा) दो किष्कु-चार हाथका एक धनुष ७।४६ धनुधर (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३० धम्मिल (व्य) श्रीभूति ब्राह्मण के स्थानपर रखा गया एक ब्राह्मण २७।४३ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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