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________________ दुर्मुख (व्य) वसुदेव और अवन्तीका पुत्र ४८।६४ दुर्मुख (व्य) एक राजा ५०१८३ दुर्मुख ( व्य वसुदेवका पुत्र ५०।११५ दुर्योधन (व्य) कौरवाग्रज हस्तिनापुरका राजा ४३।२० दुविध = दरिद्र १८/१२७ दुःशासन ( व्य ) एक राजा [ कौरव] ५०/८४ दुःषमा (पा) अवसर्पिणीका पाँच काल ७।५९ पुष्पक्वाहार (पा) भोगोपभोगका अतिचार ५८।१८२ दुष्पूर (व्य ) पूरणका पुत्र ४८।५१ दूषण (पा) ज्ञाता और दर्शना वरणका आस्रव ५८ ९२ दृढधर्मा (व्य ) हृदिकका पुत्र ४८४२ दृढ (व्य ) समुद्रविजयका पुत्र ४८।४३ दृढबन्ध ( व्य ) एक राजा ५०।१२६ दृढमुष्टि (व्य) राजा वृषभध्वजका योद्धा ३३।१०३ दृढमुष्टि (व्य) वसुदेव- मदनवेगाका पुत्र ५०।११६ दृढवर्मा (व्य ) एक राजा ५०।१३२ दृढ (व्य) समुद्र विजयके भाई अक्षोभ्यका पुत्र ४८|४५ दृढरथ (व्य) भगवान् ऋषभदेव - का गणधर १२।५५ दृढरथ (व्य ) बृहद्रथका पुत्र १८ १८ दृढरथ ( व्य ) नरवरका पुत्र १८१८ दृढरथ (व्य) राजा मेघरथ और सुभद्राका पुत्र १८ ११२ Jain Education International शब्दानुक्रमणिका दृढायुध (व्य ] वैदिशपुरका युवराज ४५।१०७ दृति - मशक ४३ । १२२ दृष्टिवादाङ्ग (पा) द्वादशांगका एक भेद दृष्टिमोह (पा) सम्यग्दर्शनको घातनेवाला दर्शनमोह २।११३ दृष्टिमुष्टि ( व्य वसुदेव और मदनवेगाका पुत्र ४८६१ दृष्टिविष = सर्पविशेष ११।९४ देव (व्य) देवनन्दी, अपर नाम पूज्यपाद आचार्य १।३१ देवकी (व्य) कंसकी बहन जो वसुदेवको विवाही गयी ३३।२९ देवकुरु ( भी ) सुमेरु और निषध के बीच में स्थित प्रदेश, जहाँ भोगभूमिकी रचना है ५।१६७ देवकुरु ( भो ) निषध पर्वतसे उत्तरकी ओर नदीके मध्यमें स्थित एक हृद ५।१९६ देवकुरुकूट (भी) सौमनस्य पर्वत का एक कूट ५।२२१ देवकुरुकूट (भौ) विद्युत्प्रभ पर्वत का एक कूट ५१२२२ देवगर्भ (व्य) बिन्दुसारका पुत्र १८।२० देवच्छन्द (भौ) अकृत्रिम चैत्या लयोंका गर्भगृह ५/३६० देवदत्त (व्य ) राजा अमरका पुत्र १७।३३ देवदत्त (व्य) अर्जुनके शंखका नाम ५१।२० देवदत्त (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३६ देवदत्त (व्य ) कृष्णका पुत्र ४८ ७१ For Private & Personal Use Only ९२३ देवदेव (व्य) आगामी तीर्थंकर ६०१५५९ देवपाल (व्य ) देवकीका पुत्र ३३।१७० देवपाक (व्य ) धनदत्त और नन्दयशाका पुत्र १८ ११४ देवमति (व्य ) देविलकी स्त्री ६०।४३ देवनन्द (व्य) राजा गंगदेवका पुत्र ३३।१६३ देवनन्द (व्य ) बलदेवका पुत्र ४८ ६७ देवरमण ( भी ) मेरुका एक वन ५/३०७ देववर ( भी ) अन्तिम सोलह द्वीपोंमें चौदहवाँ द्वीप ५।६२५ देवशर्मा (व्य) भगवान् ऋषभदेवका गणधर १२।५५ देवशर्मा (व्य ) एक राजा ५०।८४ देवसम्मति (भौ) ब्रह्मयुगलका दूसरा इन्द्रक ६।४९ देवसेन (व्य) भोजकवृष्णि और पद्मावतीका पुत्र १८१६ देवसेना (व्य) यक्षिलकी स्त्री ६०/६३ देवस्व = देवद्रव्य १८ १०२ देवाग्नि (व्य) भगवान् ऋषभ देवका गणधर १२/५७ देवानन्द (व्य ) जरासन्धका पुत्र ५२/३५ देवानन्द (व्य ) एक राजा ५०।१२५ देवारण्य (भौ) विदेहक्षेत्र में स्थित वन ५१२८१ देवावतार ( भी ) पूर्वमालव देश में स्थित एक तीर्थ ५०/६० देविल (व्य) एक मनुष्य ६० १४३ www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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