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________________ ९२२ हरिवंशपुराणे दधिमुख (भौ) नन्दीश्वर द्वीप की वापिकाओंमें स्थित पर्वत ५।६६९ दभ्र = गवाक्ष-झरोखा ५।२६५ दमवर (व्य) एक मुनि ३४।३२ दमरक(व्य) वसुदेवके भवान्तर से सम्बन्ध रखनेवाला एक पुरुष १८४१३१ दमघोषज = शिशुपाल ४२।९३ दर्शन = नेत्र ८॥२३ दर्शनक्रिया (पा) एक क्रिया ५८०६९ दर्शनावरण(पा) दर्शनको ढकने वाला कर्म ५८।२१५ दर्शनविशुद्धि - भावना ३४।१३२ दर्शनशुद्धि-व्रतविशेष ३४।९८ दशपर्विका-एक विद्या २२१६७ दशपूर्विन् = दशपूर्वके ज्ञाता श५८ दशम = चार उपवास ३४।१२५ दशरथ (व्य) बलदेवका पुत्र ४८०६७ दशरथ ( व्य) एक राजा ५०।१२५ दशकालिक (पा) अंगबाह्य श्रुतका एक भेद २११०३ दशार्णक (भौ) देशका नाम १०७३ दशाह = यादव ४११४९ दशाह = योग्य अथवा पूज्य १८।१४ दशाह (व्य) राजाविशेष ५०।६८ दशेरुक (भी) देशका नाम १०६७ दासीदास प्रमाणातिक्रम (पा) परिग्रह परिमाणाणुव्रतका अभिचार ५८।१७६ दान (पा) सातावेदनीयका आस्रव ५८/९४ दाण्डीक (भो) देशका नाम १११७० द्वारवती ( भो ) सौराष्ट्र देशमें स्थित नगरी ११७२ दारु (व्य ) वसुदेवकी स्त्री पद्मावतीका पुत्र ४८५६ दारुक (व्य) वसुदेवकी स्त्री पद्मावतीका पुत्र ४८५६ दारुण (व्य) एक भील २७।१०७ दिक्कुमार = भवनवासी देवोंका एक भेद ४।६४ दिग्गजेन्द्र (व्य) देवोंकी एक जाति ५।२०९ दिग्नन्दन (भो) रुचिकगिरिका एक कूट ५१७०६ दिति (व्य ) धरणेन्द्रकी देवी २२१५४ दिति (व्य) धारणयुग्म नगरके राजा अयोधनकी स्त्री २३१४७ दिग्यचक्षु = अवधिज्ञानी४२१५० दिव्य ध्वनि ( पा) भगवान्को निरक्षरी वाणी ३।१८१ दिव्यपुर (पा) समवसरणका एक भाग जिसके त्रिलोकसार आदि सौ नाम हैं ५७।११२ दिव्यलक्षण पंक्तिविधि-व्रत विशेष ३४।१२३ दिव्यवाद (व्य) आगामी तीर्थ कर ६०१५६२ दिग्यौषध (भौ) वि. द. नगरी २२।९९ दिशानन्दा ( व्य ) वैदिशपुरके राजा वृषध्वजकी पुत्री ४५।१०९ दिशावली (व्य ) वैदिशपुरके राजा वृषध्वजकी स्त्री ४५।१०८ दीपन ( व्य) सुखरथका पुत्र १८।१९ दीर्घदन्त (व्य) आगामो चक्र वर्ती ६०५६३ दीर्घबाहु ( व्य) सुबाहुका पुत्र १८२ दीर्घहस्व (पा) आग्रायणीपूर्वके चतुर्थ प्राभृतका योगद्वार १०८४ दुःख (पा) असातावेदनीयका आस्रव ५८।९३ दुःख (भी) तीसरी पृथिवीके प्रथम प्रस्तारसम्बन्धी तप्त नामक इन्द्रकी पूर्वदिशामें स्थित महानरक ४१५४ दुःखहरणविधि = व्रतविशेष ३४।११७ दुग्धवारिधि ( भो ) अरिसमुद्र नामका पांचवा समुद्र २०५३ दुन्दुमि = दुन्दुभि नामका वर्ष १९।२२ दुर्ग (भी) देशका नाम ११७१ दुर्जय (व्य ) जरासन्धका पुत्र ५२१३७ दुर्दर्श(व्य) पूरणका पुत्र४८१५१ दुर्धर (व्य ) जरासन्धका पुत्र ५२।३१ दुर्धर (व्य ) राजा उग्रसेनका पुत्र ४८।३९ दुर्धर (व्य) पूरणका पुत्र ४८५१ दुर्भग = भाग्यहीन १८।१२८ दुर्मुख (व्य ) जरासंधका पुत्र ५२।३७ दुर्मुख (व्य ) पूरणका पुत्र ४८१५१ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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