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________________ शब्दानुक्रमणिका ९२५ धर (व्य) एक राजा ५०1८३ धर (व्य) राजा उग्रसेनका पुत्र ४८।३९ धरण (व्य) भवनवासियोंका इन्द्र ९।१२९ धरणीतिलक (भौ) वि. द. का । एक नगर २७।७७ धरणेन्द्र (व्य) जयन्त मुमिका जीव २७।१७ धरावती (व्य) अयोध्याके राजा हेमनाभकी स्त्री ४३।१५९ धर्म (व्य) धर्मनाथ-पन्द्रहवें तीर्थंकर ११७ धर्म (पा) जीव और पुद्गलके गमन में कारण एक द्रव्य ७२ धर्म (पा) इसके उत्तम क्षमा आदि १० भेद हैं २।१३० धर्मतीर्थ = धर्मको आम्नाय ३।१ धर्मचक्र (पा) तीर्थकर जिनेन्द्रके समवसरण में विद्यमान देवोपनीत चक्र २११४५ धर्मचक्रिन् = धर्मचक्रके धारक __ जिनेन्द्र-तीर्थकर ५४।५८ धर्म्यध्यान (पा) प्रशस्त-ध्यान___ का भेद ५६।३५ धर्ममार्ग (व्य) सुभद्र और सुमित्राकी पुत्री ६०११०१ धर्मरुचि (व्य) एक मुनि ६४।९ धर्मरचि (व्य) धनदत्त और नन्दयशाका पुत्र १८।११५ धर्मसंज्ञापा)एक चारण ऋद्धि धारी मुनि ६०१७ धर्मसेन (व्य) एक मुनि६०।६४ धर्मसेन (व्य) दशपूर्वके ज्ञाता एक आचार्य ११६३ धारण पा) स्फटिक शालका मग गोपुर ५७।५८ धारण (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।२९ धारण (व्य)एक राजा५०१११८ धारण (व्य) अन्धकवृष्णि और सुभद्राका पुत्र १८।१३ धारण (व्य) जरासन्धका पुत्र ५२।३७ धारणयुग्म (भौ) भारतवर्षका __ एक नगर २३।४६ धारणा (पा) मतिज्ञानका भेद १०११४६ धारिणी (व्य) सूर्याभकी स्त्री ३४।१७ धारिणी (व्य) अयोध्याके समुद्र दत्त सेठकी स्त्री ४३११४९ धारिणी = एक विद्या २२१६८ धार्तराष्ट्र (व्य) दुर्योधन आदि सौ कौरव ४५।४३ धातकीखण्ड (भो) दूसरा द्वीप ५।४८९ धातु-वैणस्वरका भेद १९११४७ धीमान् (व्य) बलदेवका पुत्र ४८१६७ धीर (व्य) कृष्णका पुत्र ४८५७० धुनी = नदी ( यमुना) ३५।२८ धूपिन = एक जहरीला साँप ३३।१०८ धूमप्रभा (भो)नरकोंकी पांचवीं भूमि ४।४४ धूमकेतु (व्य)एक असुर प्रद्यम्न का वैरी ४३१३९ धूमकेतु (व्य) प्रद्युम्नका पूर्वभव का वैरी देवविशेष ११०० धूमसिंह (व्य) अमितगत विद्याधरका मित्र २१२२३ एत (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।२९ ति (व्य) अक्षोभ्यकी स्त्री १९६३ ति (व्य) तिगिछ सरोवरमें रहने वाली देवी ५११३० धति (व्य) रुचिकगिरिके सुद र्शन कुटपर रहनेवाली देवी ५१७१६ प्रतिकर (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।१३ प्रतिकर (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।११ तिकर (व्य) शुभंकरका पुत्र ४५६९ धृतिकूट (भी) निषधाचलका छठा कूट ५।८९ प्रतिक्षेम (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४३।११ प्रतिद्युति (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।१३ सृष्टद्युम्न (व्य) राजा द्रुपदका पुत्र ४५।१२१ धृष्टद्युम्न (व्य)एक राजा५०७९ ततेजस् (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।३२ तिदृष्टि (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।१३ धृतिदेव (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।११ धृतधर्मा (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।३२ तपद्म (व्य ) कुरुवंशका एक राजा ४५।१२ श्तमान (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।३२ तिमित्र (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।११ तयशस् (व्य) कुरुवंशका एक राजा ४५।३२ धृतराज (व्य ) कुरुवंशका एक राजा ४५।३३ तराष्ट्र (व्य)राजा धृतराज और अम्बिकाका पुत्र ४५।३४ एतराष्ट्रसुत = कौरव १११०८ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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