SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 937
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ अमरकडा (भौ) धातकीखण्डके भरतक्षेत्र अंगदेशकी एक नगरी ५४।८ अमरावर्त (व्य) कौथुमिका शिष्य ४५ ४५ अमम (पा) चौरासी लाख अममांगों का एक अमम ७ २८ अममाङ्ग (पा) चौरासी लाख अममांग अटोंका एक ७२८ अमळ (व्य) समुद्र विजय का मन्त्री ५०।४.९. अमा (अव्यय) साथ ५५।२९ अमितगति (व्य) चारुदत्तके द्वारा उपकृत और चारुदत्तका उपकार करनेवाला विद्याधर २१।२३ अमितगति (व्य) वसुदेवका गन्धर्वसेना से उत्पन्न पुत्र ४८/५५ अमिततेज (व्य) गगनचन्द्र और गगनसुन्दरीका पुत्र ३४।३५ अमित्रेतरमण्डल = मित्रमण्डल सूर्यमण्डल २।११ अमितसार (पा) स्फटिक साल का पश्चिम गोपुर ५७/५९ अमितप्रम (व्य) वसुदेव और बालचन्द्राका पुत्र ४८ ६५ अमृतपायिन् = देव ५५/२५ अमृतप्रभ (व्य) अभिचन्द्रका पुत्र ४८।५२ अमृतबल (व्य) अतिबलका पुत्र १३।८ अमृतरसायन (व्य) चित्ररथका रसोइया ३३१५१ अमोघ ( भी ) रुचिकगिरिका दक्षिण दिशा सम्बन्धी कूट ५/७०८ अमोष- चक्रवतोंका बाण १११६ Jain Education International शब्दानुक्रमणिका अमोघ ( भो ) अधोग्रैवेयकका दूसरा इन्द्रक ६।५२ अमोधक (पा) स्फटिक सालका उत्तर गोपुर ५७/६० अमोघमूला (शक्ति) = कृष्णका शक्ति नामका अस्त्र ५३।४९ अमोघदर्शन (व्य) चन्दनवन नगरका राजा २९।२४ अम्बा (व्य) राजा धृतराजकी एक स्त्री ४५।३३ अम्बर (पा) सब द्रव्योंको स्थान देनेवाला आकाश द्रव्य ७/२ अम्बिका (व्य) राजा धृतराजकी एक स्त्री ४५।३३ अम्बुज = श्रीकृष्णका पांचजन्य शंख ५५।६१ अम्बुदावर्त (भो) भगली देशका एक पर्वत ६०।२० अम्बालिका (व्य) राजा धृत राजकी एक स्त्री ४५।३३ अम्मोधि (व्य ) समुद्रविजयके भाई अक्षोभ्यका पुत्र४८४५ अयन (पा) तीन ऋतुओं -छह मासका एक अयन होता है ७।२१ अयुत '= दश हजार ४२८१ अयोगकेवली (पा) चौदहवाँ गुणस्थान ३१८३ अयोध्य (व्य) भरत चक्रवर्तीका सेनापति ११।२३ अयोधन (व्य ) धारणयुग्म नगर का राजा २३।४६ अयोधन (व्य) राजा मत्स्यका सौ पुत्रों में ज्येष्ठ पुत्र १७।३१ अयोध्या (भी) विदेहकी एक नगरी ५।२६३ आयुकर्म (पा) नरकादिपर्यायका कारण कर्म ५८।२१७ अर (व्य) सप्तम चक्रवर्ती For Private & Personal Use Only ८९९ अर (व्य) आगामी तीर्थंकर ६०१५६० अरम् = शीघ्र ३५।३० अर (व्य ) अठारहवें तीर्थंकर सातवें चक्रवर्ती ४५/२२ भरजा ( भी ) विदेहकी एक नगरी ५।२६२ अरविभाषा (पा) सत्यप्रवाद पूर्वकी बारह भाषाओं में से एक भाषा १०।९४ अरिंजय (व्य ) विनमिका पुत्र २२ १०४ अरिंजय (भो) वि. द. नगरी २२।९३ अरिंजयपुर (भौ) विदेहका एक नगर ३४।१८ अरिंजय (व्य) अरिंजयपुरका राजा ३४।१८ अरिंजय (भौ) वि. उ. नगरी २२।८६ अरिन्दम (व्य) विनमिका पुत्र २२।१०५ अरिन्दम (व्य ) एक मुनि १९८२ अरिष्टनेमि (व्य) राजा मही दत्तका पुत्र १७ २९ अरिष्ट (भौ) ब्रह्मयुगलका पहला इन्द्रक ६।४९ अरिष्टपुर ( भी ) विदेहका एक नगर ६०।७५ अरिष्टपुर (भौ) एक नगर जहाँ राजा रुधिर रहता था ३१।९ अरिष्टविमान (भौ ) यमलोकपालका विमान ५।३२५ अरिष्टसेन (व्य ) आगामी चक्रवर्ती ६०।५६५ अरिष्टसेन (व्य) धर्मनाथका प्रथम गणधर ६०/३४८ अरिष्ट (भी) रुचकगिरिका एक कूट ५।७०५ www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy