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________________ ७४८ हरिवंशपुराणे जयसेनस्य कौमार्य त्रिशती मण्डलेशिता । विजयस्तु शतं राज्यं सहस्त्रं नवशत्यपि ॥५१४॥ चतःशती तपस्तस्य ब्रह्मदत्तकुमारता । अष्टाविंशतिवर्षाणि षट्पञ्चाशस्लमण्डली ।।५१५।। विजयः षोडशाब्दानि षट् शतानि त राजता । ब्रह्मदत्तस्य विज्ञेया केशवानां त कथ्यते ॥५१६।। त्रिपृष्ठस्य सहस्राणि कौमार्य पञ्चविंशतिः । विज्ञेयोऽब्दसहस्रं तु विजयः स्नेहवाहिनः ।।५१७॥ वर्षलक्षास्त्रयोऽशीतिसहस्राणि तु सप्ततिः । चतुर्भिरधिका तस्य राज्य राजकराजितम् ।।५१८॥ द्विपृष्ठस्यापि कौमार्य मण्डलैश्यमपि स्फुटम् । सहस्राणि समाख्यातं प्रत्येक पवविंशतिः ।।५१९।। विजयोऽब्दशतं लक्षा राज्यं तस्यैकसप्ततिः । चत्वारिंशत्सहस्राणि नवतिर्नवशत्यपि ॥५२०॥ द्वादशव सहस्राणि पञ्चशत्या स्वयंभुवः । कोमाय मण्डलेशत्वं विजयो नवतिः पुनः ॥५२॥ एकान्नषष्टिकक्षाश्च चतःसप्ततिरेव च । सहस्राणि शतै राज्यं नवभिर्दश पञ्चकः' (?) ॥५२।। पुरुषोत्तमकौमाय मतं सप्त शतानि तु । अशातिर्विजयस्त्रीणि शतान्यब्दपहस्रकम् ।।५२३।। मण्डलेशत्वमेतद्धि त्रिशल्लक्षा विनैककम् । नवतिश्च सहस्राणि सप्तभिर्नवशत्यपि ॥५२४|| हुए* ||५१२-५१३॥ ग्यारहवें जयसेन चक्रवर्तीकी कुल आयु तीन हजार वर्षको थी। उसमें तीन सौ वर्ष कुमार अवस्थामें. तीन सौ वर्ष मण्डलीक अवस्थामें सौ वर्ष दिग्विजयमें, एक हजार नौ सं वर्ती होकर राज्य अवस्थामें और चार सौ वर्ष संयम अवस्थामें व्यतीत हुए। और बारहवें ब्रह्मदत्त चक्रवर्तीको आषु सात सौ वर्षकी थी। उसमें अट्ठाईस वर्ष कुमार अवस्थामें, छप्पन वर्ष मण्डलीक अवस्थामें, सोलह वर्ष दिग्विजयमें और छह सौ वर्ष राज्य अवस्थामें व्यतीत हुए। ये संयम धारण नहीं कर सके और मरकर सातवें नरक गये। इस प्रकार चक्रवतियोंकी आयुका विवरण कहा और नारायणोंको आयुका विवरण कहा जाता है ।।५१४-५१६।। स्नेहको धारण करनेवाले त्रिपृष्ठ नारायणकी कुल आयु चौरासी लाख वर्षकी थी। उसमें पचीस हजार वर्ष कुमार अवस्थामें, एक हजार वर्ष दिग्विजयमें और तेरासी लाख चौहत्तर हजार वर्ष राज्य अवस्थामें व्यतीत हुए। ॥५१७-५१८॥ द्विपृष्ठ नारायणकी कुल आयु बहत्तर लाख वर्षकी थी। उसमें पचीस-पचीस हजार वर्ष कुमार अवस्था तथा मण्डलीक अवस्थामें, सौ वर्ष दिग्विजयमें और इकहत्तर लाख उनचास हजार नौ सौ वर्ष पर्यन्त राज्य किया ।।५१९-५२०॥ __ स्वयम्भू नारायणको कुल आयु साठ लाख वर्षकी थी। उसमें बारह हजार पांच सौ वर्ष कुमार अवस्थामें, इतने ही मण्डलीक अवस्थामें, नब्बे वर्ष दिग्विजयमें और उनसठ लाख चौहत्तर हजार नौ सौ दस वर्ष राज्य अवस्थामें व्यतीत हुए ॥५२१-५२२॥ पुरुषोत्तम नारायणकी कुल आयु तीस लाख वर्षकी थी। उसमें सात सौ वर्ष कुमार अवस्थामें, एक हजार तीन सौ वर्ष मण्डलीक अवस्थामें, अस्सी वर्ष दिग्विजयमें और उनतीस १. नवभिर्दशवर्षकैः ( ङ. पुस्तके टिप्पण्यां पाठान्तरम् )। *. तिलोयपण्णत्ति में हरिषेण चक्रवर्तीको आयु दस हजार वर्षको बतायी है। उसमें तीन सौ पचीस कुमार अवस्थाम, इतने ही मण्डलीक अवस्थामें, एक सौ पचास दिग्विजयमें, आठ हजार आठ सौ पचास वर्ष राज्य अवस्थामें और तीन सौ पचास वर्ष संयमी अवस्थामें बीते हैं । t. तिलोयपण्णत्तिमें पचीस हजार वर्ष कुमार अवस्थामें, पचीस हजार वर्ष मण्डलीक अवस्था में, एक हजार वर्ष दिग्विजथमें और शेष तेरासी लाख उनचास हजार वर्ष राज्य अवस्थामें व्यतीत हुए ऐसा लिखा है। Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001271
Book TitleHarivanshpuran
Original Sutra AuthorJinsenacharya
AuthorPannalal Jain
PublisherBharatiya Gyanpith
Publication Year2003
Total Pages1017
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari, Literature, & Story
File Size26 MB
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