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________________ पृष्ठ विषय-सूची विषय पृष्ठ विषय उत्पाद-व्यय सामान्यका नहीं, हेतु तथा आगमसे निर्दोष विशेषका होता है ५० सिद्धिकी दृष्टि ७१ उत्पादादिकी भिन्नता और अन्तरंगार्थता-एकान्तकी बौद्धनिरपेक्ष होनेपर अवस्तुता ५१ मान्यता सदोष ७२ एक द्रव्यकी नाशोत्पादस्थिति- विज्ञप्ति-मात्रताके एकान्तमें में भिन्न शावोंकी उत्पत्ति ५२ ।। साध्य-साधनादि नहीं बनते ७३ वस्तुतत्त्वकी त्रयात्मकता ५३ ।। बरिरंगार्थता-एकान्तकी कार्य-कारणोंकी सर्वथा सदोषता ७४ भिन्नताका एकान्त ५४ उक्त उभय तथा अवक्तव्य उक्त भिन्नतैकान्तमें दोष ५६ । एकान्तोंकी सदोषता ७५ अनन्यता-एकांतकी सदोषता ६० उक्त दोनों एकान्तोंमें अपेक्षाकार्यकी भ्रान्तिसे कारणको भेदसे सामंजस्य भ्रांति तथा उभयाभावादिक ६१ जीवशब्द संज्ञा होनेसे कार्य-कारणादिका एकत्व सबाह्यार्थ है माननेपर दोष संज्ञात्व-हेतुमें व्यभिचार-दोषका उक्त उभय तथा अवक्तव्य निराकरण एकान्तोंकी सदोषता ६३ संज्ञात्व-हेतुमें विज्ञानादैतवादी एकता और अनेकताकी की शंकाका निरसन ७८ निर्दोष व्यवस्था बुद्धि तथा शब्दकी प्रमाणता और सिद्धिके आपेक्षिक-अनापेक्षिक सत्याऽनतकी व्यवस्था बाह्यार्थके एकान्तोंको सदोषता ६६ होने न होने पर निर्भर ८० उक्त उभय तथा अवक्तव्य दैवसे सिद्धिके एकान्तकी एकान्तीकी सदोषता ६८ सदोषता उक्त आपेक्षिकादि एकान्तोंकी। पौरुषसे सिद्धिके एकान्तकी निर्दोष-व्यवस्था ६८ सदोषता सर्वथा हेतुसिद्ध तथा आगम- उक्त उभय तथा अवक्तव्यसिद्ध एकान्तोंकी सदोषता ६९ एकान्तोंकी सदोषता ८४ उक्त उभय तथा अवक्तव्य दैव-पुरुषार्थ-एकान्तोंकी एकान्तोंकी सदोषता ७० निर्दोष-विधि ८५ ७६ ७७ Jain Education International For Private & Personal Use Only www.jainelibrary.org
SR No.001170
Book TitleAptamimansa
Original Sutra AuthorSamantbhadracharya
AuthorJugalkishor Mukhtar
PublisherVeer Seva Mandir Trust
Publication Year1978
Total Pages190
LanguageHindi, Sanskrit
ClassificationBook_Devnagari & Philosophy
File Size9 MB
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