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श्री शांतिदास - विरचित
श्री गौतमस्वामी रास ( चौपाई ) ॥
- सं. विजयशीलचन्द्रसूरि
श्रमण भगवान महावीरना आद्य पट्टशिष्य गणधर श्री गौतमस्वामीनो प्रभाव वर्णवती एक वधु लघु-रचना अत्रे प्रस्तुत छे : गौतमस्वामी रास. तेना रचनार एक गृहस्थ - श्रावक छे, एम तेनी अंतिम कडीमांना "शांतिदास" एवा नामाचरणथी जणाय छे; अने ते ज आ रचनानी विशेषता छे. अत्यार सुधीमां प्रसिद्ध थयेल अने प्रचलित बनेल, गौतम गणधर विषयक रचनाओ साधुओ द्वारा ज रचायेली छे, ते संदर्भमां श्रावक रचित आ रचना खास ध्यानार्ह छे.
रास चौपाई - प्रकारनो छे. तेनी रचना सं. १७३२मां थयानुं अंतिम कडीमां निर्देशायुं होवाथी, तेना कर्ता शांतिदासनो सत्तासमय १८ मा शतकमां होवानुं सहेजे स्वीकारी शकाय. आधी वधु वीगतो माटे 'जैन गुर्जर कविओ' तथा मध्यकालीन साहित्यकोश जेवां साधनो तपासवां पडे.
आ रचना ६६ कडीमां पथरायेली छे. मंगलाचरण थया पछी, गोबरग्रामनुं परंपरागत रोते पण ट्रंकुं वर्णन, (४६) अने वसुभूति तथा पृथ्वी - ए विप्रदंपतीनो परिचय छे. (६) त्यारबाद, माता पृथ्वीए इन्द्रसभानुं स्वप्न जोयानी अने तेना फळ स्वरूपे 'इन्द्रभूति' पुत्रनी प्राप्तिनी वात, आ रचनामां ज, सर्वप्रथमवार जोवा मळे छे (७-९). पछीनी चार कडीओमां अति संक्षेपमा जन्मथी मांडी वादीविजेता तरीकेनी छाप पाम्या सुधीनी कथा प्रत्ये अंगुलिनिर्देश छे. (१०१३). पछी प्रभु वीरनुं आगमन, यज्ञारंभ, देवोनुं आगमन, वाद अने विजय माटे प्रयाण, मानत्याग अने संशयछेदनपूर्वक वीरस्वामीनुं शिष्यत्व, द्वादशांगीनुं सर्जन अने ज्ञानप्राप्ति, छेवटे निर्वाण (१४ - २६ ) नुं खूब ट्रंकमां ज वर्णन छे. आ बधामां कविनी प्रतिभानो कोई विशेष प्रभाव जणातो नथी.
आ पछीनी संपूर्ण रचनामां गौतमनुं नाम अने ध्यान केवुं महिमावंत छे, तेनुं लोकप्रिय अने लोकभोग्य वर्णन छे, जे जोया पछी, गौतमस्वामीनो प्रभाव वर्णववो ए ज कविनुं ध्येय होवानुं स्पष्ट थई जाय छे.
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[52]
आ रचनानी एकमात्र प्रतिनी झेरोक्स नकल मारी पासे मौजूद छे, जे प्रति डभोईना श्रीरंगविजय-शास्त्रसंग्रह-भंडारनी छे. बे पत्रो धरावती आ हस्तप्रति, तेनी लखावट जोतां १९मा शतकमां लखाई होय तेवू अनुमान थाय छे. आ रचनानी बीजी प्रति हजी सुधी तो क्यांय जोवामां नथी आवी. कोई सुज्ञ जनना ध्यानमां आनी प्रति होय अथवा आ रचना तथा तेना कर्ता विशे विशेष काई ज्ञातव्य होय तो तेओ ते विशे माहिती मोकले तेवी विनंति.
३
श्री शांतिदास-विरचित श्री गौतमस्वामी-रास (चौपाई) ॥
सरस वचनदायक सरसती, अमृत-वचन मुखथी वरसती । सहिगुरु केलं कीजें ध्यांन, अलवें आलें बुद्धिनिधान ।। तीर्थंकर चोवीसे तणा, एकमनां गुण गाउं घणा ।। वीहरमांन जिन वंदुं वीस, सीद्ध अनंता नामुं सीस ॥ सुमत गुपत पालें मन सुद्ध, नमुं साधुं जस नीर्मल बुद्ध मुझ मत सारूं करूं अभ्यास, कहस्युं गौतमस्वामीनो रास ॥ जंबुद्वीप अनो(पम) भगुं, भरतखेत्र ते मांहि सुj मगधदेस वसें अभीरांम, इंद्रपूरी सम गोबरगांम ।। गढ मढ मंदिर पोल प्राकार, वावि सरोवर नाती विस्तार लखेसरी कोटीसर घणा, दानेसरी ती नहं तीहां मणा ॥ घणा विप्रतणो तिहां वास, वेद पूराणनो करई अभ्यास सघलामांहि वडो अधीकार, वसुभुति विप्र धर प्रथवी नारिं ॥ अर्धनिसा पोढि जेतलई, इंद्रभुवन दिर्छ तेतलई । जागि मनस्युं करई विचार, आवि जिहां , निज भरतार ।. स्वामि सुपन लयूं मि इस्यूं, तेहतणुं फल कहो मुझ किस्यु वसुभुत विप्र विचारि कहई, प्रथविदेवि ते सद्दहई ।। तुम कुखहुं सुत होस् सार, च्यार वेदतणो भणनार जैन धर्म तै दीपावस्यें, त्रिभुवन पूजनीक ते थस्यें ।।
६
७
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[3] मा प्रसवानव पूत्र थाय (?), जनम्यो पूत्र हरणे तस माय मूरत जोवा मांडि घडी, धवलमंगल गाई गोरडी ॥ कुंकमनां किधां छांटणां, पंच सबद तिहां वाजई घणां तलीआं तोरण बांध्यां बार, जोवा आवई नरनई नार ।। दसमई दिन तस दिधुं नाम, इंद्रभुत रूपइं अभीरांम दिन दिन वाधई चढती कला, सीखई सास्त्र सवे आंमला ॥ १२ च्यार वेद मुखपाठई करई, वांणी संस्कृत मुखइं उचरड् वादि सवे मनावि आंण, इंद्रभुत विद्यानी खांण ॥ समोसर्या तिहां विरजिणंद, समोसरण रचई सुरइंद त्रगडई बइठा त्रिभुवनस्वामि, जाइं पाप जस लिधई नाम ।। १४ जेहनई छई अतिसय चोत्रीस, वांणी गुण जेहनइं पांत्रीस जोजनभुमि देसना विस्तरई, भविक जिवना संसय हरई ॥ १५ इंद्रभुत करइं जगनारंभ, रचिओ मंडप रोप्यो थंभ वेदाध्ययन करई विप्रषनवा (?), विद्या कुंभतणी परई भर्यां ॥ १६ आवई रिषनई आवई देव, इंद्रभुत तस सारई सेव हवन करई मंत्राक्षर भणी, देवदुंदुभी आकासई सुणी ।। जे (जै)न देव ए कुंण आवीओ, आउंबर एतो लावीओ हुं जईनई जीतुं एहनई, सीस नमावीइ सुर जेहनई ॥ एम कही चाल्यो जेतलई, समोसरण दिडं तेतलई सीह दिठइं गज मुंकइं मांन, इंद्रभुत मुकउं अभीमांन । ए को ब्रह्मा ए को ईस, चंद सूर कई ए जगदीस अणसमझ्ये हुं आव्यो वही, ए साधई जीते स्युं नहीं ।। मन केरी संदेह भांजस्यई, इंद्रभुत तो चेलो थस्यें इम कही आघो आवीओ, वीरई नांमई बोलावीओ ॥
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जीवतणो तुझनें संदेह, जीव अ(छ)ई तुं जांणे एह मन केरो संदेह टलिई, बोल्यूं वचन मुखथी पालीइं ॥ २२ इंद्रभुत तव संज्यम लीध, वीरें गौतम गणधर कीध अंग इग्यार चौद पूरव भणइं, सूत्र सीद्धांत वीर मुखथी सुणइं ।। २३ मन(मति) श्रुत अवधि मनपर्यव ग्यांन, गौतम पाम्यूं च्यार गनांन लबध अट्ठावीस उपनी वली, हाध(?) सीद्ध सीख थाई केवली ।।२४ वीरतणुं हूउं नीरवांण, गौतम पांम्या केवलज्ञांन ॥ विहार करई महिमंडल मांहिं, भविक जीव प्रतिबोधई त्यांह ।। २५ केवल पर्याय पूरण करी, गौतम स्वामि पंचम गति वरी ते गौतमना जे गुण गाय, सकल मनोरथ पूरण थाय ॥ २६ आर्य खेत्र श्रावक कुलमांहिं, गौतम नांमई आवई त्यांहि दीर्घ आयु पंच इंद्री जेह, गौतमनांमई लहीइं तेह ।। साच्या देव-गुरु साचो धर्म, दान-शील -तप-भावना मर्म सूत्र सिद्धांत सुणवानो भाव, गौतमनांमई एह सभाव ।। सप्तभुमि उंचा आवास, ते मांहि रहेवानो वास वृषभ-हय-गजसाला जोडि, गौतमनामइं पूरई कोडि । घर घरणीस्यूं नीर्मल चीत्त, गौतम नांमई पूत्र विनीत माता पिता बंधवनई वहू, गौतमनांमई मानइं सहू ।। नीमजां पस्तां अषोड बदाम, द्राष चारोली मेवा नाम साकरदल आंबारस सार, गौतमनांमई तेहनो आहार ।। खीर खांड धृत साकर सूखडी, सालिं दालिं पोली नई वडी सेव लापसी दुध में दही, गौतमनामई लहीइं सही ॥ पांन सोपारीनो मुखवास, लविंग एलची कपूर बरास काथो चूनो मेल्यो संजोग, गौतमनांमई बीडां भोग ।।
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[55]
सालू भेरव नई पांमरी, चीर पटोलां देसाउरी जरतारी वस्त्र पहेंरणई, गौतमना गुण जे नर भाई ||
वेढवांकलां नदुं (नई) सांकली, कंदोरा पहेंरई मनरूली कडी नवनां हीरई जड्यां, गौतमनांमई अंगई चढ्यां ॥
दार झूमणां झांझर झमकार, कांकण कांकणी अती हई सफार चाक चांदलो रूडो घड्यो, गौतमनांमई ते सीर चढ्यो ||
चूआ जबाद कस्तुरी फूल, अंबर अरगजानुं बहू मुल केसर चंदननां छांटणां, गौतमनांमई दीसई घणां ॥ ढोल तलाई मीसरूतणी, गालमसुरीआं चादर सुणी भला सेज करो आराम, सुखसाता लहइं गौतमनांम ॥
गज घोडां पायक पालखी, गौतमनांमई थाई सुखी रथ धोरी बेसी संचरई, गौतमध्यांन रिदयमां धरई ॥
पद्मद्रथी आवें वही, सीदेवी घरवासइं रही गौतमनामई थीर रहई सही, खरचंतां खुटई पीण नहीं ॥ विणज करतां नावइ खोट, गौतमनांमई सबली चोट लखेसरी कोटीस्वरीपणुं, गौतमनांमई दीसई घणुं ॥ वस्तु बहू प्रवहण भरई, भरदरीआमांहिं संचरई गौतमनांमई नहीं तोफांन, कुसलई ल्यावई बहूं नीधांन ॥
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सुभ सकुन लहई जातां गांम, सुभ सूपनांतर गौतम नांम सुभ मुहूरत सुभ काजई मिलई, गौतमनामई अफलां फलई || वैरी मीत्र सरीखा थाय, गौतमनांमई प्रणमई पाय ना ( रा ) जा मांनई सहू को नमई, गौतमध्यान ऋदयमां रमई ॥ जी जी कार सहू को करई, बोल्युं वचन नवि पार्छु फीरई कीरतवेल पसरई जग बहूं, गौतमनांमई इछई सहूं ॥
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[56] नवे निधांननी इच्छा फलें, गौतमनामई संपत्त मिलें नवविध परीग्रह जेतो मेर, छप्पन्न उपर वाजई भेर ।। सोनासीद्ध नई परीसा सीद्ध (?), गौतमनांमई सबली रीद्ध कांमकुंभ चिंतामणी जेह, गौतमनांम लहीइं तेह ।। चीत्रावेल दक्षिणाव्रत कह्यो, गौतमनांमई ते घर रह्यो कांमधेन दुझबई आंगणई, गौतमनां गुण जे नर भणइं ॥ सबदवेद्ध लाधई केटिका, रस आवई रसकुंपी थीका गौतमना गुण गाइं तेह, अष्ट माहासीद्ध पांमई तेह ।। नागमंत्रु जांगुलीमंत्र, फले तास चिंतामणीजंत्र सीद्ध औसधी आवई काम, ते लहीइं गौतमनें नाम ।। मंत्र जंत्र जगमांहिं धणा, आराधन देव देवी तणा गौतम नाम मंत्र महीमाय, अखुट वस्तू घर सघली थाय ॥ गौतम मंत्र जपो एकांत, जिणें मंत्रे जग वरतइं सांत जिणें मंत्रई विछी उतरइं, जिणें मंत्रै विष सघलां हरई ।।
५१
५२
भूतप्रेत जिणें मंत्रइं जाइं, जिणें मंत्रइं सनमुखु थाइं तेह ।। ५३ जिणें मंत्रइं कांमण नीसरई, मारई मुठ ते पाछी फीरइं नवग्रह पीडा नवी करई, चेटक चोरास(सी) नीसरई ।। ५४ भाजई आठिल भाजई एथ कडी(?), गौतम नांमई न रहई घडी बंदीखांणाथी मुंकाय, राजा रूठो सनमुख थाय ॥ जेणें मंत्रइं धार बंधाय, जेणें मंत्रइं अगनी उलाय गौतमनांम मंत्र छइं इस्युं, अवरमंत्र- कारण किस्यु ।। चौदपूरवमांहिं जेतला, विद्यामंत्र अछइं तेतला अधीक मंत्र गौतमनुं नाम, जिणें मंत्रइं सवी सीझई काम । ५७
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[571
व्याधि सत्योत्तरसो उपसमें, गौतमध्यांन ऋदयमा रमें मरणघात थकी उगरई, गुरु गौतम जा सांनीध करई ॥ ५८ दीसंतो जे माहा विकराल, ते विषधर थाई फूलमाल केसरी सघला मुंकें मांन, गौतमनामइं साहिइं कांन । जलमां बुडंतां दीइं हाथ, मारग भुलां मेलें साथ विघन उपजतां वेगई वलई, मन सुद्धई जो गौतम मिलई ॥ ६० परदल आव्यां पाछां फरई, गौतमसांमि जो सांनीध करई चोर पराछी(घी) धाउ फांसीआ, गौतमनांमई ते वप्र(?) कीआ ।। ६१ गौतमनांमें थाइं सुगाल, गौतमनामइं टलई दुकाल ईत उपद्रव मरगी जेह, गौतमनांमें नासई तेह ॥ चौदसई बावन गणधर सुण्यां, तीर्थंकर चोवीसे तणा अधीक प्रतापी गौतमस्वामि, पाप पणासई जेहनई नाम ॥ ६३ गयणांगण को तारा गणई, मेरु अंगुल वली को नर मणइं समुद्रनीरनी संख्या थाई, गौतमना गुण कह्या न जाय ॥ ६४ प्रह उठीनई पवीत्रहपणई, गौतमना गुण जे नर भणई श्रवणे सुणतां सुख बहू थाय, दुख दालीद्र सवी दुरइं जाय ।। ६५ संवत् सतर बत्रीसौं कहूं, आसो सुदि दसमी दिन लहूं कर जोडी कहइं शांतिदास, गौतम ऋषि आलो सुखवासो (स) ॥६६
इति श्री गौतमस्वामिरास संपूर्ण : ॥
सुदोसण मध्य लषीत्यं ॥ श्री ॥
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१५/१
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४९/१
सुमत गुपत
५३/१ पद्मद्रह
४३/२
सीदेवी
४६ / ३
नवविध परिग्रह
६२ / १
६२ / ३
तलीआं
समोसरण
त्रगडई
अतिसय
देसना
जगनारंभ
केवलपर्याय
पंचम गति
जेतो मेर
केटिका
सुगाल
ईत
[58]
कठिन शब्दोनो कोश
सुकाल
—
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-
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समिति (पांच) अने गुप्ति (ऋण); चर्यामां आवता पदार्थो
तळियां-घरनां आंगणां
तीर्थंकरनी धर्मदेशना - भूमि
त्रिगडे-त्रण गढ़ना बनेला समोसरणमां
तीर्थंकरनी विशिष्टता
देशना
यज्ञनो आरंभ
केवल ज्ञानवाळी अवस्था
मोक्ष
पद्म सरोवर
श्रीदेवी
-
प्रवचन
जैन साधुनी
लक्ष्मीदेवी
धन-धान्य-क्षेत्र-वास्तु-रूपुं- सुवर्ण कुप्य द्विपदचतुष्पद - ए नव जातनो संग्रह
मेरु जेटलो
ईति - कुदरती आपत्तिओ-७ सातनी.
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पढमाणुओग (अनुसं. ६) गत-विशेषनाम्नां सूचिः ॥
- विजयशीलचंद्रसूरि पंक्ति
नाम
अउज्झा अज अजिय
अजिय
२६/१४; ३६/१७ २५-२२/२७ २६/७,३८/१७, ३९/३
अजियजिण अज्जकालिय अज्जकालियारिय अज्जक्खउडारिया अज्ज मल्लारीया अज्ज महागिरि अज्जरक्खिय अज्जसुहत्थि
२६
३२/१८; ३३/१७
२७ ३२/१८; ३३/१९-२७; ३४/१९
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अज्जसुहत्थिसीस अट्ठावय अणाइनिहण अणिल अनिरुद्ध अपराइय अपराजिय अमरउर अमियलिंग अयलदत्त. अयलपुर
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अरिटुनेमिपडिमा अरिटुवरनेभी अरिष्टनेमि अरिष्ठनेमि अरिहदत्तगणहारी अवंतिवई अवरकंका अवरविदेह आइ आइतित्थ आइनाह आमराय आसतित्थ आसदेव आसवई आससुर आससेण आसावबोह आसावबोहण आसावबोहतित्थ
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उज्जेणी उज्झिलसिहर उज्झिलाइ उत्तरायण उलखउरअहिवई उसभ उसह उसहजिण उसहनाह उसहपडिम असहसामि अंजणा अंधगवन्हि अंबा अंबादेवी अंवग
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गोयमरिसी गोयमसामि गोयमा
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गावद्धण गोविंदारिय घोरघटसिद्धपुत्त चंदपहास चंदपुर चंदप्पह
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२८/४,१२,१५,१७; २८/२४; ३०/४,५; ३१/४,१७ २२/१०,२९/१४ ३४
चंदप्पहतित्थ चंदप्पहतित्थगर चंदप्पहपडिम चंदप्पहपडिमा
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३१
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चंदप्पहपडिमा जीवंतसामि चंदप्पहास
चंदप्पहासखित्त
चंदारिय
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चंदेराया
चंदेरि
चंदेरी
चंप
चिंतामणि
चक्केसरी
चवड
चारुचंदकरित
चारुदत्त
चेडग
छत्तसिल
छत्तसिला
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जरासिंध
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जालामालिणि जालामालिणी
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जीवंतसामिपडिमा
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जोगराया
जोइलिंग
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ढंढणकुमार
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[67]
तिलुक्क
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२९/१६; ३०/११; ३२/१३
तुंगहिसिहरी तुंगीसिहर तेलुक्कसामिणी तेलोकसामिणी दंडगअडवि दक्षिणावह
दत्त
७/७:२१/७,४१/२०, २१,२२,४२/६,७
२९
दत्तराय दमघोस
७/३,८;२०/२५; २१/९:२६/१९
३
३०/१५,१७
३८
दविड दसरह दसरहपुत्त दसवयण दाहिण दाहिणसंड दिन्हराउ दिलीव दीवायण दुगासय दुप्पसह दुमग दुलहराया दुवारवई
१६/१६,२५ ३४ .
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--------------------------------------------------------------------------
________________
देवइ
देवानंदिसिट्ठि
देवराय
धमिहुण
धाईसंड
धाईसंडविदेह
धारिणी
धी
धूमराय
धूलिकुट्ट
नंद
नंदि
नंदिवर्द्धण
नंदीसर
नमि
नमीसर
नम्मया
नम्मयातीर
नयवाहण
नरवाहण
नरसिंहदेव
नवहलपट्टण
नहयलगामिणी
नागज्जुण
नारयरिसि
नासिकउर
नासिक्कउर
नाहड
१६
३२
४०
४
२७
७
१२
२९
३८
२५
११
१७
२०/१५:२९/१८
१०/२२,२५/१२
२१
८
[68]
२२
२०/२५,२१/९
२६/१३
३९
२३
२६
२९
२२/८,२६/२२,२७,३८/७
१६/२९;३१/१६
१७
३१
३२/२२:३३/५,६,११,
३६/२
१२
२०
१९
३
३
१०
२२
१२
१७
३
२३
२१
२५
१२
२७
ব
१०
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________________
[6]
३४
३४ ३८/१०, ४२/२५
९/९;११/२६,२०/७ १७
१७
१६/१८;३०/२१
३२
२३
६/१२,९/२१ २१/४;२६/१२ २१
नाहडचक्कवटी नाहडराय नाहडराया निव्वाणसिला नेमि नेमिनाथ पंडवपुत्त पंडवा पंडुमहुरा पंडुराया पंडू पइट्ठाणपुर पइट्ठाणवइ सालिवाहण पउम पउम चक्कि पउमनाह पउमपुंडरीय पउमुत्तर पज्जुन पढमाणुओग पयट्ठाणपुर परमारवंस पवणजय पवणराय पहासखित्त पहासजक्ख पाडवा पाडलिपुत्त
७/१२,३६/१२
२०
११/२१:१६/१९,२१/२५
* * * * * * * *
४०/२७,४१/४
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________________
[7]
२६
पाडलिपुत्ताहिव-दत्त पालित्तारिया पुंडरिअ पुंडरिउ पुंडरिउराया पुंडरिकिणी पुंडरिय
२६/१४:२९/१० ४/११,१२ २१/१०,२१
६/२३;७/१६:९/२७; १७/२०:२१/२०
२६
४/२२,५/४;७/१०,९/२६ २२
पुंडरीअ पुंडरीय पुंडरीयतित्थ पुक्खलावई पुडलतित्थ पुण्यनाडयदीव पुन्नभद्द पुलक्ख पेढालपुत्त बंभकुंड बंभगिरी बंभलोइंद बंभसंति बंभसंती
MPM Mor
३४/१०; ४०/११,२४ ३६/९,११; ३७/१० १७
बंभिंद
बलभद्द बलमित्त
बहली बारवई
११/१८,२४;१२/२; १४/१,१६/२५
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________________
बुद्धि भद्दगुत्तारिया
भरह
भरहेसर
भरुयच्छ
भरुयच्छट्टाण
भव्ववरपट्टण
भागीरथ
भाणुमित्त
भाणू भारहीपडिमा
भावड
भासयसिग्गह
भासरसियगह
भिउपट्टण
भिउपुर
भूयड भेरवाणंद
मंडव
मणिभद्द
मयंदकुंड
मयण
मयणसत्थवाह मरुंडदेस
[71]
१७/२२:१८/२०; २३/२२
२९
२६
२१
९
२५/२०, २२;
२६/२,९,१३
२७
३७
२१
९
७
२०
६
२९
४१
२३/१३:२४/६
६/१३,२२/११;
२३/११,२४/१९
४०
३८ / १७, २१, २७:३९/३
३८
३६
१८.
१९/१,३,८,२४;
२०/२,८,२३/१७
१८
४
२२
२
२२
८
२
८
२०
२१
८
z
१
१३
१०
१३
९
१४
२
२७
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________________
मरुदेवी
मरुदेस
महतित्थ
महव्वय
महागिरि
महातित्थ
महापीढ
महाभैरवी
महाविदेह
महावीर
महासेणराया
महिंदसीह
महुर
महुरा
महुराए
महुराथूभ
महूय
महस्वर
माघविसेस
माणिभद्र
माणुसुत्तर
मायली
मालवदेस
मालवण्या
मुणिसुव्वय
युगादिपुरुषेन्द्र
रघु
उड
६
३४
१७
६/७, ११
३३
१८/४; २३/११
२५
३८/१८, २७
६
२६
३०
३९
१९
[72]
११/३;३७/१९
४०
१९
६
५
२९
३६
२९
१२
३९
४०/१५, १७, २२
२२/१३:२३/१
७
२३
३८
६
११
६
२७
११
२९
५
३
१५
१०
२८
११
२४ ६
m
८
१६
६
१७
२६
१८
६
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________________
रयणउर रहनेमि रहनेमी राइमइ राइमई
394
१२/३,१४,१३/२२, २५,२८,१४/६; १५/२६,१६/१०,२१/२६ २१/२४,२३/१८; ३१/१५
डूबा
रायणवण रावण रिटुनेमि रुप्पिणी
रेउइ
१५ १४/१५,१५/२३;४१/१
Wor vNI
A.
रेवय रेवयगिरि रेवयतल रेवयवण रेवयसिहर
२९
११/५,१५,१५/१२; १६/४,१९,१७/११,१९; १८/६:२१/२७,२२/५; २३/८,२९/१५
लंका लंकानयरि लक्षण लक्खणादेवी लच्छि लद्धअंवाएस
12. MM
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________________
[7]
लवणसमुद्द लाड वइरसामी वउलवाहण वद्धमाण वद्धमाणपडिमा वद्धमाणसामि वयरसामि
४/२,४०/१६,४२/२४; ३७
६/१०,१६, ५/६; ६/१७, २८/१
२५
९/२,१४/१,१५/८,१३
वरदत्त वरदिन्न वलभद्र वलहि वलहिभंग वलही
www.2MMA
१६
३६
५/३;२१/१,२६/१३; ३६/२४; ३७/२
वसंतउर वसहनाह वसुदेव वाणारसी वाणारसीराया वारवई
was
.
१२/१२,१३/२७; १६/१०,१९ १७/२७,४०/२९
वारवई वाराणसी वालिखिल्ल वाली वासुपुज्ज विइलेवावण
* *
* *
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________________
विक्कम विजयकेऊ
विजयबाहु
विणायग
विण्हू
विदेह
विनमी
विभकर
विभीसण
विमल
विमलगिरि
विमलगिरी
विमलपुर
विमलमती
विमलवाहण
वीर
वीरजिण
वीरपडिमा
वीरपुर
वेणुवंत
वेयालबल
वेसमण
वेसमणजक्ख
वोडियादिट्टी
[75]
२५/२६,३६/१८, २१
२७
२४
१६
१७
९/२५,२०/२६,२७/४;
२१
१५
२१
५/१७,७/१,८;
९/१३:४२/६;
४/३,२२,५/७,२६;
६/२०७/२४,२२, २७;
८/११,१८,२१/२,३,१८;
२५/२६; ३७/५४१/१;
४
६
६
२०/२६:२१ / ११;
४/२,१७/१७,२५/१३;
२९/१८;३०/२४
३६/११,२१,३९/१४;
३४ / १७; ३८/४;
३८.
११
३९
१९/२३; १९/२८
११
२९
२१
९
२१
२४
७
२०
१६
१६
९
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________________
शिवंकर
संख
संघाएस
संति
संदण
संपण्या
संपई
संब
सउणी
सउणीविहार
सउणीविहार
सक्क
सगर
सगराई
सच्चइ
सच्चइरुद्द
सच्चइरुद्दाइ
सच्चाई
सच्चउर
सच्चउरनिवेस
सच्चउरपट्टण
सच्चउरपुर
सच्चभामा
सुज्जण
८
३४
३४
४/२१;५/५
८
२५
३३
१६/१६,१९,२१/२५;
२३
२४
२४
[76]
४
१९/२३;३५/२९; ४१/८;
२१
३०
२९
२९
३०
२७/२३४/२३;३८/८, १७,२२:३६/२२;
३९ / ३,६,१४,१८,२०;
४०/३,१७,१९;
४१/१,२३४२/३,८
३६
३४ / १२,२७
३६
११/११; १२/१
२१
२५
२८
२७
२५
१९
२०
२५
२५
२१
१८
२३
२६
१
७
२४
१९
१६
५
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________________
ก * * * * , * *
१८/१,२८
၃၃
*
सत्तुंजयतित्थ समंतभद्दारिया समुद्ददत्त समुद्दविजय सयकित्त सयासिव सरस्सई सरस्सई सरस्सईपट्टण सरस्सई वीढ सव्वट्ठसिद्ध सव्वाणुभूइ तित्थगर ससिभूसण सागरपोतासि सारावलीगंडिया सारावलीसुत्त सालाहण सिंघलदीव सिंहकन्न सिंहविक्रमदेव सित्तुंज्ज
९/२५,२७/४; २७
* * * * * * *
५/१९,२१,१७/१९; २७/८; ५/२३,२१/२०
सित्तुंज्जय सिद्ध सिद्धखित्त सिद्धतित्थ सिद्धत्थनरिंद सिद्धपुत्त
2222
20
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________________
[78]
*
* *
* * *
* *
3 4
सिद्धपुर सिद्धमठ सिद्धराय सिद्धसेण सिद्धसेणदिवायर सिरि सिरिकलस सिरिगुणसुंदर सिरिगुणसुंदरसीस सिरिगोयमसामि सिरिपउमनाह सिरिपुर सिरिपूसमित्तारिय सिरभट्ट सिरिमाल सिरिमालपट्टण सिरिमालपुर सिरिवइरसेण सिरिमुणिसुव्वयपडिम सिरिवद्धमाण सिरिवद्धमाणविज्जा सिरिवयरसामी सिरि सुव्वय
" 3 แต่
३७/३; ४०/१५ ३८ ३८/२०; ३९/५; ४०/१८
२४/८, २५/६; २६/२३, २७/१० २७ २६/१३,३६/२४
सिरिसुव्वयतित्थ सिलाइच्च सिलाएच्च सिवकर
२१
१५
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--------------------------------------------------------------------------
________________
सिवखित्त सिवभत्ता पंडवा
सिवरती
सिवा
सीमंधर
सीया
सीयाविहार
सुग्गीव
सुदंसणा
सुद्धमइ
सुमंगला
सुमइ
सुरद्वा
सुविही
सुव्वय सुव्वयतित्थ
सुव्वयपाय
सूरदेव
सूरनरिंद
सूरियाभ
सेलगायरिया
सोमभट्ट
सोमय्य
सोमल
सोमलिंग
✔
२१
२८
२८/१७; ३०/८
१०
__७/२९/२५
६/२९; ७/३;
३१ / १५; ३२ / १२
२९/९; ३०/१४
२१
[79]
२४/२-२४-२५:२५
/ २७,२६/३,१०,१५,
२०,२३,२७,२७/२०
८
२४
३०
८/१५;११/५
'४/२०,२१,२३
२४
२३
२४
२७
२३
२५
२१
१५
३०
१६
२९
१८
१७
१४
२४
२५
१
no 10 m
१६
१३
११
१
२०
१३
2 w w m v
२५
६
२६
१३
८
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________________ [80] 38 सोमसंभू सोद्ध सोरटुङ 6/15:19/24 4/3;19/12:30/4 10 16/28,38/27,39/1 सोटुय सोरियपुर हत्थिणाउर हत्थिणागपुर हम्मीरराउ हरिवंस हरिसेण dancy हरी हिरि विक्रमओ 1029 विक्कमउ 1247 1426 1518 1570 6 नोंध :- आ रचनामा उल्लेखायेला उपरनां वर्षो उपरथी, आ रचना वि.सं. 1570 पछी रचायेली होय एम अनुमान साव सरलतापूर्वक करी शकाय तेम छे. -शी.