Book Title: Vyakhyapragnaptisutram Part 01
Author(s): Divyakirtivijay
Publisher: Shripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust

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Page 19
________________ कम: क्रमः श्रीभगवत्यङ्ग CEIR श्रीभगवत्यङ्ग श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-१ // 10 // विषयानुक्रमः 324 विषयः सूत्रम् पृष्ठः विषयः सूत्रम् पृष्ठः पूर्वभवलेश्या प्रश्नाः। 159 313 तत्परिवारभूततद्भक्तिकदेव प्रश्नाः / माय्यमाय्यनगारयोर्विकुर्वणसामर्थ्य ग्रहदंडग्रहयुद्धग्रहणादि तस्य वश्याः / 16 तत्कारणाऽऽराधकत्वादि प्रश्नाः। 160 314 2 यमलोकपालस्य वरशिटमहाविमानस्थानादि 3 शतके उद्देशकः 5 तत्परिवारभूततद्भक्तिकादिदेव प्रश्नाः। अनगास्यस्त्रीविकुर्वणाधिकारः। कलहप्राणक्षयादिज्ञाता। पञ्चदश साधो: स्त्र्यादिअश्वादिरूपविकुर्वणो परमाधार्मिकाः तद्यथापत्याः। 166 328 वोत्पतनादिशक्तिमात्रं माय्यमाय्यादि वरुणस्य स्वयंज्वलस्य महाविमानस्य आभियोगिकोपपातादि प्रश्नाः। स्थानस्वरूपादि तदाज्ञाकारी देवादि प्रश्नाः। [3.6] 3 शतके उद्देशकः 6 अतिवृष्टि उदकोढ़ेदादि तस्य वश्याः। 167 331 नगराधिकारः। वैश्रमणस्य वल्गोर्महाविमानस्य स्थानमायीमिथ्यादृष्टि, अमायीसम्यग्दृष्टि स्वरूपतदाज्ञाकारीदेवादि प्रश्नाः। अनगारस्य नगरविकुर्वणसामर्थ्य तथा सुवर्णाकरसुकालादि तस्य वश्याः। ऽतथाभावजानीयादित्यादि प्रश्नाः। 3 शतके उद्देशक:८ चमराऽऽत्मरक्षकदेवप्रश्नाः / 164 322 / अधिपतिरधिकारः। [3.7 3 शतके उद्देशकः 7 असुरनागपिशाचज्योतिष्कालोकपालाधिकारः। नामधिपतयः प्रश्नाः। शक्रस्यलोकपाला: तेषाञ्चविमानप्रश्नाः। सौधर्मेशानयोर्निवास्यधिपतयः प्रश्नाः। 169 333 सोमस्य संध्याप्रभमहाविमानस्यस्थानस्वरूपादि ||3.9] 3 शतके उद्देशकः 9 168 332

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