Book Title: Tirthankar Ek Anushilan
Author(s): Purnapragnashreeji, Himanshu Jain
Publisher: Purnapragnashreeji, Himanshu Jain

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Page 263
________________ तीर्थंकर : एक अनुशीलन 88 242 86. | श्री भटेवा पार्श्वनाथ श्री उवसग्गहरं पार्श्वनाथ श्री अलौकिक पार्श्वनाथ श्री कल्पद्रुम पार्श्वनाथ श्री कुक्कुडेश्वर पार्श्वनाथ श्री भुवन पार्श्वनाथ श्री रावण पार्श्वनाथ श्री कामितपूरण पार्श्वनाथ श्री अवंती पार्श्वनाथ श्री सवीना पार्श्वनाथ श्री चंदा पार्श्वनाथ श्री मक्षी पार्श्वनाथ श्री अंतरिक्ष पार्श्वनाथ 99. श्री जगवल्लभ पार्श्वनाथ 100. श्री गिरुआ पार्श्वनाथ 101. श्री मनोवांछित पार्श्वनाथ | श्री विमल पार्श्वनाथ श्री विघ्नहरा पार्श्वनाथ 104. श्री महादेवा पार्श्वनाथ 105.| श्री आनंदा पार्श्वनाथ 106. | श्री चारुप पार्श्वनाथ 107. | श्री चिंतामणि पार्श्वनाथ 108.| श्री गोड़ी पार्श्वनाथ चाणस्मा, जिला महेसाणा (गुजरात) नगपुग, जिला दुर्ग (मध्य प्रदेश) हासामपुरा, जिला उज्जैन (मध्य प्रदेश) धीयाभेड़ी, जिला मथुरा (उत्तर प्रदेश) कुक्कुडेश्वर, जिला मन्दसौर (म.प्र.) खंभात, जिला खेड़ा (राजस्थान) अलवर (राजस्थान) उन्हेल, जिला उज्जैन (मध्य प्रदेश) अनन्तपेठ, जिला उज्जैन (मध्य प्रदेश) सवीनाखेड़ा, जिला उदयपुर (राजस्थान) । पेलेस रोड, जिला उदयपुर (राजस्थान) मक्षीजी, जिला उज्जैन (मध्य प्रदेश) शिरपुर, जिला आकोला (महाराष्ट्र). कुंभोजगिरि, जिला कोल्हापुर (महाराष्ट्र) अमलनेर, जिला जलगाँव (महाराष्ट्र) नेर, जिला धुलिया (महाराष्ट्र) वाणियावाड, जिला छाणी (गुजरात) रांदेर. सूरत (गुजरात) पाटण, जिला महेसाणा (गुजरात) उंबरी, जिला बनासकांठा (गुजरात) - चारुप, जिला महेसाणा (गुजरात) नासिक सिटी, (महाराष्ट्र) पायधुनी, मुंबई (महाराष्ट्र) 102. 103. इसके उपरान्त भी अहिच्छत्र पार्श्वनाथ, त्रिभुवनभानु पार्श्वनाथ इत्यादि अनेक नाम भी प्रसिद्ध हैं। कतिपय विद्वानों के अनुसार इस प्रकार नाम संग्रह से 1008 नाम तक लिखे जा सकते हैं। जिसकी आत्मा संयम, नियम और तप में तल्लीन है, उसी की सच्ची सामायिक होती है, ऐसा केवली भगवान ने कहा है। - अनुयोगद्वार सूत्र (127)

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