Book Title: Tattvartha Sutra
Author(s): Umaswati, Umaswami, Vijay K Jain
Publisher: Veer Shasan Sangh Calcutta

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Page 146
________________ अध्याय - ९ The afflictions can occur simultaneously from one to nineteen. सामायिकच्छेदोपस्थापनापरिहारविशुद्धिसूक्ष्मसाम्पराय __ यथाख्यातमिति चारित्रम् ॥१८॥ [सामायिकच्छेदोपस्थापनापरिहारविशुद्धिसूक्ष्मसाम्पराययथाख्यातम् ] सामायिक, छेदोपस्थापना, परिहारविशुद्धि, सूक्ष्मसाम्पराय और यथाख्यात [इति चारित्रम् ] इस प्रकार चारित्र के 5 भेद हैं। Equanimity, reinitiation, purity of non-injury, slight passion, and perfect conduct are the five kinds of conduct. अनशनावमौदर्यवृत्तिपरिसंख्यानरसपरित्यागविविक्तशय्यासनकायक्लेशा बाह्यं तपः ॥१९॥ [अनशनावमौदर्यवृत्तिपरिसंख्यानरसपरित्यागविविक्तशय्यासनकायक्लेशा] सम्यक् प्रकार से अनशन, सम्यक् अवमौदर्य, सम्यक् वृत्तिपरिसंख्यान, सम्यक् रसपरित्याग, सम्यक् विविक्तशय्यासन और सम्यक् कायक्लेश - ये [ बाह्यं तपः ] छः प्रकार के बाह्य तप हैं। . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . 133

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