Book Title: Tattvartha Sutra
Author(s): Umaswati, Umaswami, Vijay K Jain
Publisher: Veer Shasan Sangh Calcutta

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Page 158
________________ अध्याय पुलाकबकुशकुशीलनिर्ग्रन्थस्नातका निर्ग्रन्थाः ॥४६॥ [ पुलाकबकुशकुशीलनिर्ग्रन्थस्नातका ] पुलाक, बकुश, ये पाँच प्रकार के कुशील, निर्ग्रन्थ और स्नातक [ निर्ग्रन्थाः ] निर्ग्रन्थ हैं। - - Pulāka, Bakuşa, Kuşila, Nirgrantha, and Snātaka are the passionless saints. संयमश्रुतप्रतिसेवनातीर्थलिंगलेश्योपपादस्थानविकल्पतः साध्याः ॥४७॥ उपरोक्त मुनि [ संयमश्रुतप्रतिसेवनातीर्थलिंगलेश्योपपादस्थानविकल्पतः ] संयम, श्रुत, प्रतिसेवना, तीर्थ, लिंग, लेश्या, उपपाद और स्थान इन आठ अनुयोगों द्वारा [ साध्याः ] भेदरूप से साध्य हैं, अर्थात् इन आठ प्रकार से इन पुलाकादि मुनियों में विशेष भेद होते हैं। They are fit to be described (differentiated) on the basis of differences in self-restraint, scriptural knowledge, transgression, the period of Tīrthamkara, the sign, the colouration, birth, and the state or condition. ॥ इति तत्त्वार्थाधिगमे मोक्षशास्त्रे नवमोध्यायः ॥ *** ९ 145

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