Book Title: Tattvapradipika Nayanprasadini Tika
Author(s): Chitsukhmuni, Pratyayaswarupmuni, Nirmaloddhavsinh
Publisher: Nirmaloddhavsinh

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Page 15
________________ यदाह निश्चितौहिवार्दकुरुनइतिना पिपरस्यनस्याप्यनुव्यवसायेन निर्णीतवादन एव नो भयो सस्मादविवसि तस्यले विशेष रिसानीत्यस्यन केन्च नार्थे पश्यामः नच के वलव्यतिरेकिण्वन सिद्ध विशेष नानामनदूषणमिति मेनव्यं नया सनिवसुधा शशविषाणो लिखि नाव सुधावादित्यादिना । विषाणादेरपि सिद्धिप्रसंगान अथनत्रम ||माणात वा धपाटुचना नाम सिद्धविशेषणनयेति ब्रूषेतन्त्रबाधका सिंहेनहि शशविष नामभावावेदकमा माणमन्तिनस्य प्रमाणांतर योग्यता योग्यनयोरभावा सिद्धेः प्रथनियम णानुपलेभो बाधकः ननो निशि कानहिकाना मात्र सिद्धविशेषणनेनिघट्टकुटीप्रभातायिते अथ विष बाधकन की भावात् सकिविपक्षेनाथ असपानवेशिनसधरणान कतकपानान वपभा धननाथ: क: गानानह गानचानय ान ानरान विकोष योगाभावान् प्रथमेनुनको भा ान ानषण चि केवलव्यतिरेकित्वादेव केव सपवष सन: सी गनाक बलान्य वणना कथा गोड सनइति सत्यत्यो केवल ब्य चारणा नैकानिकमा चेतिदूषणमुक्के नत्र माना मायेभूनेवल व्यतिरेकान्वयव्यतिरेको व भवचि निशंकमान घ सरापक्षः खीकने व्यथा चोचमा मह मसिद नाहानिरसा हद्दुभावान

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