Book Title: Sramana 1998 10
Author(s): Shivprasad
Publisher: Parshvanath Vidhyashram Varanasi

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Page 7
________________ ३४२ श्रमण : अतीत के झरोखे में लेखक वर्ष अंक Jain Education International ई० सन् पृष्ठ २८ २२ ३१-३४ १७-२२ १९ ___ For Private & Personal Use Only १. दर्शन-तत्त्व मीमांसा और ज्ञान मीमांसा अकलंकदेव की दार्शनिक कृतियाँ डॉ० मोहनलाल मेहता अजीवद्रव्य श्री हुकुमचन्द्र संगवे अध्यात्मवाद और भौतिकवाद डॉ० सागरमल जैन अध्यात्मवाद : एक अध्ययन श्री देवेन्द्रमुनि शास्त्री अध्यात्मवादियों से पं० उदय जैन अन्त: प्रज्ञाशक्ति दर्शनाचार्य मुनि योगेश कुमार अतयात्रा मुनि राजेन्द्रकुमार 'रत्नेश' अन्तरालगति डॉ० बशिष्ठनारायण सिन्हा अनेकान्त : अहिंसा डॉ० जगदीशचन्द्र जैन अनेकान्त अहिंसा का व्यापक रूप अनेकान्त एक दृष्टि श्री ऋषभचंद जैन ‘फौजदार' अनेकान्त दर्शन मुनिश्री नगराज जी अनेकान्तवाद डॉ० प्रतिभा जैन अनेकान्तवाद और उसकी व्यावहारिकता डॉ० विजय कुमार अनेकान्तवाद की व्यावहारिक जीवन में उपयोगिता शीतलचंद जैन ३९ २८ १९७७ १९७१ १९८० १९६७ १९७१ १९८५ १९८८ १९७७ १९६२ १९६२ १९८० १९८९ १९८३ १९९६ १९८० १४ ५४-६४ १८-२४ २-४ १९-२१ ८-१३ ७-८ ५१-५२ १०-१२ ९-१० २-९ १३-३५ २३-२७ a my ३४ ४७ www.jainelibrary.org ५ १०-१२ १० ३१

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