Book Title: Shwetambar Terapanth Mat Samiksha
Author(s): Vidyavijay
Publisher: Harshchandra Bhurabhai Shah

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Page 51
________________ ૬ श्वेताम्बर तेरापंथ-मत समीक्षा | तीर्थके लिये भी आप लोग प्ररूपणा न करें तो आपके शिरपर 'उत्सूत्रभाषी' पनेका दोष लगेगा, इस बातको विचारो । प्रश्न - ९ प्रश्नव्याकर्णरा आश्रवदुवार पेलामे देवल प्रतीमा वास्ते पृथ्वीकाय हणे जीणने मंदबुध्या कहयो तो फीर आप देवल वगेरे कराणेमं धर्म कीस शास्त्रकी रूसे परुपते हो. उत्तर - प्रश्नव्याकरण आश्रवद्वार पहिलेमें देवकुल, प्रतिमा इत्यादि बहुत चीजें गिनाई हैं । उन कार्यों को करते पृथ्वीका की हिंसा करनेवालेको मंदबुद्धिया कहा है । परन्तु उसके अधिकारी आगे चलकरके अनार्य दिखलाये हैं । पृष्ठ ३२ से ४० तकका अधिकार देखनेसे मालूम हो जायगा । उसमें मंदबुद्धिया मिथ्यादृष्टिका विशेषण है । पहिले तो यह दिखलाओ कि आप लोग मंदबुद्धिया किसे कहते हैं ? | क्या कमबुद्धिवालेको मंदबुद्धिया कहते हैं ? यदि ऐसा ही कहेंगे, तब तो केवलीकी अपक्षासे सभी मंदबुद्धिये गिने जायेंगे। परन्तु नहीं, यहां पर रूढ अर्थ लिया गया है। मंदबुद्धिया, मिथ्यात्वीको कहते हैं । समकितदृष्टिजीवकी करसे जो हिंसा होती है, उसे हिंसा कही ही नहीं है । और यदि हिंसा कहोगे तो नीचे लिखी हुई बातों को करनेवाले, तुम्हारे मन्तव्यानुसार मंदबुद्धिये कह जायेंगे : 1 १ मल्लीनाथ भगवान् ने छे राजाओंको प्रतिबोध करनेके लिये२५ धनुष्यकी सुवर्णकी पोली पूतली बनवाई। उसमें आहार के कवल छ महिने तक भरे । उसमें असंख्य जीव उत्पन्न हुए तथा मरे । अत्यन्त बदबू फैली | अब देखिये काम धर्मके निमित्त करते हुए बीचमें अनन्त जीवोंकी हानी हुई, तो तुम्हारे हिसाब से Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

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