Book Title: Shrimad Devchandraji Vistrut Jivan Charitra Tatha Devvilas
Author(s): Buddhisagar, Manilal Mohanlal Padrakar, Kaviyan
Publisher: Adhyatma Gyan Prasarak Mandal

View full book text
Previous | Next

Page 12
________________ ०-६-० ०-४-० १-०-० २०० १-०-० १-८-० १-.-० ५७.५८ आगमसार अने अध्यात्मगीना. ४७० ५९ देववंदन स्तुति स्तवन संग्रह. १७६ ६० पूजासंग्रह भा. १ लो. ४१६ ६१ भजनपदसंग्रह भा. ९ ५८० ६२ भजनपदसंग्रह भा. १० ६३ पत्रसदुपदेश भा. २ ५७६ ६४ धातुप्रतिमालेख संग्रह भाग २ १८० ६५ जैनदृष्टिए ईशावास्योपनिषद् भावार्थविवेचन. ३६० ६६ पूनासंग्रह भाग १-२ ४१५ ६७ स्नात्रपूजा. ६८ श्रीमद् देवचंद्रजी अने तेमनुं जीवनचरित्र. ६९-७२ शुद्धोपयोग वि. संस्कृत ग्रय ४ १८० ७३-७७ सघकर्तव्य वि. संस्कृत ग्रंथ ५१६८ ७८ लाला लाजपतराय अने जैनधर्म. १०० ७९ चिन्तामणि १२० ८०-८१ जैनधर्म अने ख्रिस्ति धर्मनो मुकाबलो तया जैनस्त्रिस्ति संवाद २२० ८२ सत्यस्वरूप. २०० ८३ ध्यानविचार. आत्मशक्तिप्रकाश. १४० ८५ सांवत्सरिक क्षमापना. ८० ८६ आत्मदर्शन ( मणीचंद्रजीकृत सज्जायो) नुं विवेचन. १५० ८७ जैनधार्मिक शंकासमाधान. ८८ कन्याविक्रय निषेध २०० ८९ आत्मशिक्षा भावनाप्रकाश. ११५ ९० आत्मप्रकाश. ९१ शोक विनाशक ग्रंथ १-०-० २-०-० ०-२-० ०-४-० ०-१२.० ०-१२-० ०-४-० ०-४-० १-०-० ०-६-० ०-८-० ०-३-० ०-४-० ०-२-० ०-६-० ०-७-० १-८-० ०-१-० Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

Loading...

Page Navigation
1 ... 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 ... 232