Book Title: Samavayanga Sutra
Author(s): Sudharmaswami, Hirsundar Muni
Publisher: Jaiselmer

View full book text
Previous | Next

Page 237
________________ एह नाम प्रवृत्तिशासीलाई हामी बलदेव नदनानामयमा नवने विष युव कई कीर्तिस्पन कक्ष स्पर्धे विश्वन सबैक ही।९॥ ॥ त्रिय एयाईनामाईनामा लासवासुदेवाएं एत्रो बलदेवा ज क मंकित इस मं विस्ल नंदी खबर | सागरदन असोक ॥ ललि वाराह धर्मसेना अपराजित राजललित होना नवइ वासुदेवना पूर्वसवनईविषइ 8 तापा ६ न!! विद्यान सागरते सेोगल लिएय वारादमा से ऐरा तियरायल लिएच एतेथिल एवन्देवा देवा संत सुन सुदर्शन सेयांस कहल गंगा सागर समुना में हमसेन नवमन ॥ ऊमा पूर्वरविका सेक नव धम्मचर्यञ्चाइ ॥ र त्य ४ ६ प दमा यरियामा तेजदा संस्ते सुती सदस्य सांसद गगनेट सागरसमुद्दनमिवसे लय नवम कीर्तिप्रधान प्ररुषवादेसु देव पूर्वसवन विनासी नवशनांजिहां तदाते एहोनी नवइ वासुदे सहना बन || का। नियाणा की । समइ ॥ मी धनी!! चार्थ ॥ शनिदा एातिकासित या एलेसियावा ए एतेश्म्माटारिया कितीङ रिसाए वासुदेव तत्रापि पूर्वसव नवनिया फुलाकर कहे मजराराणीगधाकरीच मेकर कनकव विषामि ॥ ॥ क्र मनवनिया गाभूमिला 1 रक्त ५ ॥ तिथी॥॥॥ दिवालिया एलुमीत छान मारा जावद चिएखरंच मरायकग सारखीय पंच राहि सावरती पोतनपुर राजगृह ॥ 8 4 नू

Loading...

Page Navigation
1 ... 235 236 237 238 239 240 241 242 243 244 245 246 247 248