Book Title: Saddharma sanrakshaka Muni Buddhivijayji Buteraiji Maharaj ka Jivan Vruttant Author(s): Hiralal Duggad Publisher: Bhadrankaroday Shikshan Trust View full book textPage 5
________________ है। इसमें उन्होंने अपने संघर्षों का व सत्य की खोज का सुस्पष्ट वर्णन दिया है, जो हमारे संघ की अनूठी सम्पदा है। उनके जीवन की विशेषता यह है कि उन्होंने असत्य का सिर्फ निषेध ही नहि किया; सत्य का केवल पक्ष ही नहि लिया; किन्तु स्वयं अपने जीवन में सत्य का हरसंभव पालन भी अचूक किया । सत्य का पक्ष लेना मगर पालन नहि करना - ऐसा दोहरा भाववर्ताव उनके जीवन में कहीं भी नहि था । इसीलिए वे जगत्पूज्य सद्गुरु एवं धर्मरक्षक महात्मा कहलाए, ऐसा कहना चाहिए । ___ "शासनसम्राट-भवन" के निर्माण के मंगल अवसर पर उन परमगुरु की भव्य गुरुमूर्ति की उक्त भवन में प्रतिष्ठा हो रही है, साथ ही साथ उनके इस चरित्रग्रंथ का प्रकाशन भी हो रहा है, यह हमारे सभी के लिए परम आनंद की बात है। इस ग्रंथ का संपादन मुनि त्रैलोक्यमंडनविजयजी ने भक्तिपूर्वक किया है। इस प्रकाशन में भावनगर के श्रीसंघ ने अपने ज्ञानद्रव्य का सद्व्यय किया है एतदर्थ धन्यवाद । -शीलचन्द्रविजय ज्ञानपंचमी - २०७० साबरमती Shrenik/D/A-SHILCHANDRASURI / Hindi Book Mukhpage (07-10-2013) (1st-1-11-2013) (2nd-12-11-13) p6.5 [5]Page Navigation
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