Book Title: Prachin Tirth Kapardaji ka Sachitra Itihas
Author(s): Gyansundar Maharaj
Publisher: Jain Aetihasik Gyanbhandar

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Page 6
________________ ORGAON भूमिका Sorateorease रवाड़ की भूमि वीर प्रसूता होने के कारण दूर दूर प्रसिद्ध है । इसकी वीर गाथाओं का इतिहास में ऊंचा स्थान है। इसमें ऐसे ऐसे शूरवीर, धीर, दानी, : मानी और अतिशय उदार व्यक्ति हुए कि जिनकी देश सेवा देख कर संसार चकित होजाता है। इसका मुख्य और मूल कारण यही है कि अपने देश के लिये उन लोगोंने हथेली पर जान लेकर उत्तम उत्तम कार्य कर दिखाए जिनके वर्णनों से इतिहास भरे पड़े हैं। मरुधरवासियों की वीरता और साथ ही साथ परोपकारिता इतनी उच्च दर्जे की थी कि जिसकी बराबरी शायद ही संसार की और जाति कर सकती हो । उत्साही योद्धा निर्बलों की सहायतार्थ बलिदान होने को सर्वदा कटिबद्ध रहते थे। आज से २,५०० वर्ष पहले का इतिहास बतला रहा है कि इस मरुभूमि में जल की इतनी कमी नहीं थी। 'हाकडा' नामक झील का मीठाजल चारों ओर फैला हुआ था। पानी की बहुतायत से चारों ओर प्रजा में हर प्रकार की चहल पहल दिखाई देती थी। जिस जगह आज जेसलमेर और बीकानेर बसा हुआ है वहाँ समुद्र था। इसका प्रमाण यह है कि भाज भी वहाँ के खोद काम में भीमकाय मच्छों के कलेवर निकलते

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