Book Title: Prachin Tirth Kapardaji ka Sachitra Itihas
Author(s): Gyansundar Maharaj
Publisher: Jain Aetihasik Gyanbhandar

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Page 74
________________ तीर्थ पर स्वन्प दान का भी महाफल। भाप सज्जन मारवाड़ के तीर्थोकी यात्रा करते समय इस भव्य मनोहर रमणीय तीर्थ की यात्रा को भी स्मरण रखें यहाँ की यात्रा करनेसे आपका दिल बहुत प्रसन्न होगा / जीर्णोद्धार प्रेमियों को चाहिये कि जिस समय अपनी चञ्चल लक्ष्मी का सदुपयोग करें उस समय इस प्राचीन तीर्थका जीर्णोद्धार , को भी ध्यानमें रखें; कारण जहाँ ज्यादा जरूरत है वहाँ द्रव्यव्यय करनेसे विशेष लाभ होता हैं / पुस्तकें भेट करते समय इस तीर्थ पर श्री पार्श्वनाथ ज्ञानभाशाको पति -..-rn पाना कर पानी यात्रा रमणीय तीर्थ की यात्रा को भी स्मरण रखें य हैं वास्ते पुपका दिल बहुत प्रसन्न होगा। मेल सके। पत्र-व्यवहार का प्रेमियों को चाहिये कि जिस सम शेठ आनन्दजी कल्यानजी (तीर्थ कापरडाजी) ठी० शा. जुगराजजी कटारिया पोस्ट-पीपाड़ सीटी ( मारवाड)

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