Book Title: Pind Niryukti
Author(s): Manekyashekharsuri, Kanchanvijay
Publisher: Devchand Lalbhai Pustakoddhar Fund
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गाथा ६०९ (पृष्ठ ११० )मां जे फुटनोट आपवामां आवी छे ते आगमोद्धारक भीए करेली छे.
गाथा ६३६ (पृष्ठ ११४ ) नी पछी " संजो " एम गाथा मानी तेनी अवचुरी करी छे पण आखी गाथा आपी नथी तेथी अमो आखी गाथा आपी शक्या नथी, तेमज अंक पण अत्रे गण्यो नथी.
गाथा ६६४ ( पृष्ठ ११८ ) ' इरियं ' एवी गाथा अवचुरीकारे मानी होय तेवुं लागतुं नथी. परंतु मलयगिरि महाराजनी टीकाना अंको कायम राखवा माटे ते गाथानो अंक अने गाथा अमे आप्यां छे.
गाथा ६६८ (पृष्ठ ११९ ) " एऐहिं" एम करीने अवचुरीकारे आखी गाथा आपी छे पण व्याख्या करी नथी मलयगिरि महाराजे ए गाथा मानी नथी, पण वीरगणिनी वृत्तिमां ए गाथा छे.
आ रीतनी गाथाओनो समन्वय थाय छे.
आनीं अंदर मूळ तरीके जे अंगीकार कयुं छे ते शिलाना आगम माटे तैयार करेली प्रतना आधारे लीघेलुं छे.<> आवी निशानीनी अंदर जे पाठ आपवामां आव्यो छे ते पाठ जेसलमेर उपरथी संवत् २००८मां उतरावेली प्रतमांनो जरुरी पाठ छे. आथी ज तेने चालुमां लीधो छे. ( ) आवा चिह्ननी अंदर ने पाठ आप्यो छे ते मलयगिरि महाराजनी टीकाना आधारे जरुरी मानीने आप्यो छे. [ ] आवाचिन्ह अंदर जे आपवामां आव्युं छे ते ते प्रतमां छे खरं पण बंधवेसे तेयुं नथी.
पिंड नियुक्तिमा (१) पिंनुं निरूपण, (२) उद्गमना दोषो, (३) उत्पादनाना दोषो, ( ४ ) एषणाना दोषो अने ( ५ ) प्रा१ जुओ मलयगिरि टीका पत्र १६५.
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