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तथा बंदूकें है, उतनी बड़ी और लम्बी भाजकल कहीं देखने या सुनने में नहीं आतीं। इनके अतिरिक्त अन्यान्य अस्त्र-शस्त्र भी बहुत बड़े आकार के हैं । ये सब शस्त्रास्त्र किनके हैं और यहा
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क्यों रखे गये है, इत्यादि बातें पूछने पर उनका पूरा-पूरा वृतान्त वहांके महन्त बहुत सम्मान के साथ लोगोंको सुनाते है । सिक्लोंका विश्वास है, कि गुरु गोबिन्द सिंह फिर एक बार यहां आयेंगे । उस समय मन्दिर के भीतर रखी हुई तलवार आपसे आप ऊपरको उठ जायेगी तथा कुएंका जल खारोसे मीठा हो जायेगा । अङ्गरेज भी इस स्थानको सम्मान की दृष्टिसे देखते हैं । प्रायः इस स्थानके प्रबन्धकी देख-रेख का भार अंशतः यहांके प्रधान जजके ऊपर भी रहता है। इसकी शाखा और भी कई नगरों में है । कलकत्तेमें हरिसन् रोडकी बड़ी संगत इसकी शाखा है । यह स्थान झाऊगंज महल्ले के पास स्वनाम धन्य महल में हैं ।
इसके अतिरिक्त मैनी संगत, नूम गोला की संगत पश्चिम दरवाजेकी संगत आदि कई स्थान सिक्खों तथा नानक शाहियों के हैं, जो परम भव्य तथा प्रभावोत्पादक हैं ।
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मुस्लिम - स्मारक - मुसलमान बादशाहों तथा सिद्ध फकीरों ( आलिम, पीर, औलिया ] के भी कितने ही स्मारक स्थान हैं; जैसे - पत्थर की भसजिद, कच्ची दरगाह, पक्की दरगाह, त्रिपोलिया, छोटी मथनी बड़ी मथनी आदि । ये सब स्थान शहरके अनेक महल्लों में हैं। मुसलमान इन स्थानोंको बड़े भादरसे देखते हैं
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