Book Title: Mukmati Mimansa Part 03
Author(s): Prabhakar Machve, Rammurti Tripathi
Publisher: Bharatiya Gyanpith

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Page 626
________________ 538 :: मूकमाटी-मीमांसा छ. पावन प्रवचन - धर्म : आत्म - उत्थान का विज्ञान, अन्तिम तीर्थंकर भगवान महावीर, परम पुरुषभगवान हनुमान (कुल ३ प्रवचन) । ज. प्रवचन प्रमेय - ( कुल १० प्रवचन) । झ. प्रवचनिका - प्रारम्भ, श्रेष्ठ संस्कार, जन्म-मरण से परे, समत्व की साधना, धर्म देशना, निष्ठा से प्रतिष्ठा । (कुल ६ प्रवचन) । पृष्ठ ६+६१८ । समग्र : आचार्य विद्यासागर ( ४ खण्ड) : प्रकाशन सम्प्रेरक- मुनि श्री क्षमासागरजी महाराज ससंघ, प्रकाशक-समग्र प्रकाशन, सन्तोषकुमार जयकुमार जैन बैटरी वाले, कटरा बाजार, सागर ४७० ००२, मध्यप्रदेश, फोन - (०७५८२) २४४४७५, २४३७५५, मो. ९४२५८- ९०९२१, प्रथम संस्करण - १९९६, मूल्य - ३०० रुपए । महाकवि आचार्य विद्यासागर ग्रन्थावली (४ खण्ड) : (चारों खण्डों का परिचयात्मक विवरण उपर्युक्तवत्) प्रकाशन सम्प्रेरक-मुनि श्री सुधासागरजी महाराज ससंघ, प्रकाशक- आचार्य ज्ञानसागर वागर्थ विमर्श केन्द्र, सेठजी की नसिया, ब्यावर - ३०५९०१, अजमेर, राजस्थान एवं श्री दिगम्बर जैन मन्दिर संघीजी, सांगानेर३०३ ९०२, जयपुर, राजस्थान, फोन - (०१४१) २७३०३९०, २७३०५५२, ५१७७३००, प्रथम संस्करण१९९६, प्रथम खण्ड-पृष्ठ-३२ + ५२८, मूल्य ८५ रुपए, द्वितीय खण्ड - ३२+६८२, मूल्य - १०० रुपए, तृतीय खण्ड-३२+४८८, मूल्य-८५ रुपए, चतुर्थ खण्ड - ३२+६१८, मूल्य - १०० रुपए । विश्वोदय (‘सागर बूँद समाय' का लघुरूप सूक्ति संकलन), सम्पादिका - सुश्री प्रीति जैन, प्राप्तिस्थानप्रकाशचन्द्र दीपचन्द्र जैन लुहाड़िया, राधाकिशनपुरा वाले, १-क-२३, हाउसिंग बोर्ड, शास्त्री नगर, जयपुर, राजस्थान, प्रथमावृत्ति-१९९६, पृष्ठ-६+३४। कौन कहाँ तक साथ देगा ( प्रवचन संग्रहों में से चयनित १०१ दृष्टान्त संग्रह), संकलक-जयकुमार जैन, हिसार, प्रकाशक- वीर विद्या संघ- गुजरात, शान्तिनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर, साबरमती, अहमदाबाद, गुजरात, प्रथमावृत्ति - १९९६, पृष्ठ- ८ + १२०, मूल्य १२ रुपए । पावन शिल्पी (आचार्य विद्यासागरजी का व्यक्तित्व एवं कृतियों का संकलन), प्रकाशन सम्प्रेरक-आर्यिका श्री दृढ़मतीजी ससंघ, प्रकाशक - त्रिलोकचन्द पवनकुमार जैन, बड़तला यादगार, सहारनपुर - २४७००१, उत्तरप्रदेश, प्रथमावृत्ति - १९९६, पृष्ठ-९२ । प्रवचनिका (सागर, मध्यप्रदेश में १९९३ में सम्पन्न पंचकल्याणक एवं गजरथ महोत्सव के प्रसंग पर प्रदत्त प्रवचन संग्रह), प्रकाशक-श्री मुनिसंघ स्वागत समिति, सन्तोषकुमार जयकुमार जैन बैटरीवाले, कटरा बाजार, सागर-४७० ००२, मध्यप्रदेश, प्रथमावृत्ति - १९९६, पृष्ठ-२६ । स्वरूप सम्बोधन - आचार्य अकलंकदेव कृत 'स्वरूप- सम्बोधनम्' (संस्कृत) का २५ हिन्दी पद्यों में भावानुवाद | १९९६, अप्रकाशित । शब्द-शब्द विद्या का सागर ('नर्मदा का नरम कंकर', 'डूबो मत लगाओ डुबकी', 'तोता क्यों रोता ?' काव्य संग्रहों का समन्वित प्रकाशन), प्रकाशन सम्प्रेरक- आर्यिका श्री दृढ़मतीजी ससंघ, प्रकाशक- विजयकुमार जैन, लक्ष्मी प्रिसिजन स्क्रूज लिमिटेड, हिसार रोड, रोहतक - १२४००१, हरियाणा, फोन - (०१२६२)२४२५२४, २४२५२० (नि.), २४८०९८, २४८७९०, मो. ९८१०१ - ७२०७९, द्वितीयावृत्ति-१९९६, पृष्ठ-४+२९० । हाइकू कविताएँ - श्री विघ्नहर पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन अतिशय क्षेत्र महुआ, सूरत, गुजरात में १९९६ से जापानी कविता शैली में हाइकू लेखन प्रारम्भ होकर अभी तक तीन सौ से भी अधिक हाइकू आलेखित। ४०. ४१. ४२. ४३. ४४. ४५. ४६. ४७.

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