Book Title: Gyansara Gyanmanjarivrutti
Author(s): Yashovijay Upadhyay, Devvachak,
Publisher: Vijaybhadra Charitable Trust Bhiladi
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................ 27/8/
१९४ श्लोक
क्रम श्लोक
क्रम सिद्धि सिद्धपुरे........... उपसं.गा.13 | स्मरौर्वाग्निज्वल० ................ 2213 सुखिनो विषया० ................ 10/8 स्वगुणैरेव तृप्ति० ............... सुलभं वागनु० .................... 137|स्वद्रव्यगुण०... .................. स्थानाद्ययोगिन०
स्वभावलाभ० ..................... स्थिरतावाङ्मनःकायै० ............. 3/5 | स्वभावलाभात्० ................ स्थीयतामनुपालम्भम्.............. 16/1 | स्वभावसुखमग्न० ............... स्थैर्यरत्नप्रदीपश्चेद्................... 3/6 | स्वयम्भूरमण० ................ ..... 6/6 स्थैर्यं भवभयादेव................. 22/8 | स्वस्वकर्मकृता० ............... स्पष्टं निष्टङ्कितं तत्त्व० ..... उपसं.गा.5 | स्वागमं रागमात्रेण............. स्पृहावन्तो विलोक्यन्ते........... 12/5 | स्वानुकूलां क्रियां०... .............. 9/3 स्फुरन्मङ्गलदीपम् ................. 29/6 |
12/1
..2/3
... 16/4
....... 16/7
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