Book Title: Gommat Prashnottar Chintamani
Author(s): Digambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti Jaipur
Publisher: Digambar Jain Kunthu Vijay Granthamala Samiti

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Page 12
________________ ।... चित्रों सहित वर्णन किया गया है, और भी अनेक सामग्री संकलित की गई. है । यह ग्रंथ अपने आप में एक नया ही संग्रहित हुया है, इस गंथ में सभी ग्रंथों से लेकर २१७८ श्लोकों का संग्रह है। ..इस ग्रंथ में पूर्वाचार्यकृत गोम्मटसार जीवकोड, त्रिलोकसार, मलाचार, ज्ञानार्गव, समयसार, प्रवचनसार, नियमसार, रत्नकरंड, श्रावकाचार, तत्वार्थ सूत्र, राज वार्तिक, प्राचारसार, अष्टपाहुड, हरिवंश पुराण, आदि पुराण, वसु नन्दी श्रावकाचार, परमात्म प्रकाश, . पुरुषार्थ सिद्ध युपाय, समयसार कलश, श्रवलादि, उमा स्वामी का श्रावका . चार,ौन सिद्धान्त प्र., दशभक्त्यादि संग्रह, चर्चाशतक , चर्चा समाधान स्याद्वाद चक्र, चर्चासागर, सिद्धान्त सार प्रदीप, मोक्ष मार्ग प्रकाशक, . त्रिकालवी महापुरुष्णादि . दा. संभों को लेकर संग्रह किया गया है, इन ग्रंथों के रचनाकार बड़े-बड़े ग्राचार्य हैं और उन ग्रंथों की हिन्दी टीका करने वाले गणमान्य पण्डित लोग और साधु जन हैं, वो ही इस ग्रंथ के रचनाकार हैं, मैं तो मात्र संग्रहकर्ता हूं। : एक धागे में मोति के समान हारवत हूं मोति भी अलग हैं और धागड .. भी अलग है इसी प्रकार. ग्रंथ का सारा श्रेय उन्हीं पूर्वाचार्यो को . व उनके हिन्दी टीका कारों को है, मैंने तो मात्र प्रयास किया है कहाँ. . तक सफल हुश्रा ये में नहीं कह सकता हूं। ज्ञानी जन ही कर सकते .. हैं। इस ग्रंथ में जो-जो वस्तु जिस-जिस ग्रंश्च से ली गयी उस-उस ग्रंथ का मैं में प्रकरण समाप्त होने के बाद नाम दे दिया है और ... : . कत्तानों का भी नाम मूल में दे दिये हैं सो जिस किसी को भी कोई शंका हो तो इस ग्रंथ को देख लें, वो ही प्रमाण है मैं नहीं । मैं तो महान् अल्पज हूँ मुझे इतना ज्ञान कहां, मैंने तो मात्र श्रवण बेल गोला ..: चातुर्मास होने के समय का सद्उपयोग किया है, स्वयं ज्ञानार्थ इसमें किसी प्रकार की त्रुटि रही हो तो ज्ञानी जन मुझे अल्पज्ञ समझ कर क्षमा करेंगे। .... इस ग्रंथ की प्रेस प्रति तैयार करने का कार्य पूर्ण रूप से श्री । १०८ मुनि पद्मनन्दी जी महाराज ने किया है और प्रेस प्रति के चित्र

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