Book Title: Girnarastha Kumar Viharni Samasya
Author(s): M A Dhaky
Publisher: Z_Aspect_of_Jainology_Part_2_Pundit_Bechardas_Doshi_012016.pdf
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१२. कर्मचन्द्र बच्छावत द्वारा नवनिर्मित मूलप्रासाद ( ई० १६ मी शतीनो अन्त भाग
Jain Egeatonternatio
BETVICE 25006000 1850 250-10000
१३. धरणा साह द्वारा विनिर्मित सम्मेतशिखर ( या नन्दीश्वरयुक्त) उत्तर दिशानो भद्रप्रासाद, ( ई० १५ मी शताब्दीनो तृतीय भाग)
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