Book Title: Dharmshiksha
Author(s): Nyayavijay
Publisher: Gulabchand Lallubhai Shah

View full book text
Previous | Next

Page 208
________________ शुद्धिपत्र - region पति अशुद्ध लेती . लाती 2 शुद्ध लेती लाते समक्त समझ विलक्षणे विलक्षण नु रुप नुरूप क्षणमें क्षण के अन्त में रुषियों ऋषियों संप- . संपत्ति च्छूि पित नान्यत्रै नान्यत्रे दर्शनम दर्शनमें . रूपकी चड रूपकीचड आत्मामें और आत्मा और च्छूि पितृ आवश्यक्ता आवश्यकता झुठा झूठा न्यायकुसुमाञ्जलिमें . धूमा जरियेसे १८ घूमा । रिएसे Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

Loading...

Page Navigation
1 ... 206 207 208 209 210 211 212