Book Title: Dandak Tatha Laghu Sangrahani
Author(s): Shravak Bhimsinh Manek
Publisher: Shravak Bhimsinh Manek

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Page 13
________________ चार होय ? एम कहे, ते बीजुं अवगाहनाहार. ३ त्रीजु (य के०) च, एटले वली (संघयणा के०) संहननानि एटले संघिविशेषने प्राप्त थाय जे शरीरावस्थाना अवयवो जेणे करीने, ते 'संहनन कहीर. ते संहनन वज्रषनाराचादि नेदोए करीने ब प्रकारनुं बे. ते जेमके एक वज्रषजनाराच, बीजु रुषजनाराच, त्रीजु नाराच, चोथु अर्धनाराच, पाचमुं कीलिका अने तुं सेवार्त. ए ब प्रकारनां संघयणमांदेला जे दंमके जेटलां संघयण लाने, ते दंमके तेटला संघयण कहेवां, ते त्रीजु संघयणद्वार जाणवु. ४ चोथु (सन्ना के०) सुंझा, एटले संझाछोर ए टले रुमा प्रकारचें ज्ञान तेने संझा कहीए. ए संज्ञा बे प्रकारनी जे. एक ज्ञानरूप अने बोजी अनुजवरूपतेमां ज्ञानरूप ते मतिज्ञान, श्रुतझान, अवधिज्ञान, मनःपर्यज्ञान अने केवलज्ञान, ए पांच नेदे करीने जाणवी. तेमां केवलझान संझा ते दायिक , अने बीजी मतिज्ञानादि सर्व संझा ते दायोपशमिकी बे. ३ कर्म ग्रंथना मते शरीरनी एक जातनी अस्थिनी रचना.

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