Book Title: Chandraraja Charitram
Author(s): Ajitsagarsuri
Publisher: Ajitsagarsuri Shastra Sangraha

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Page 10
________________ ShriMahavir JanArchanaKendra कलिकालसर्वज्ञश्रीमद-हेमचन्द्राचार्यगुणाऽष्टकम् ॥ चंद्रराजचरित्रम् ।। हेमचंद्राकार्यगुणा ऽष्टकम् मन्दाक्रान्तावृत्तम् नित्यानन्दं परमसुखदं ध्येयमूर्तिप्रभावं, ज्ञानागारं भवभयहरं सौम्यतापन्नभावम् । शुद्धस्वान्तं सकरुणमतं वन्दकानां सुनावं, सूरि ध्याया-म्यहमनुदिनं हेमचन्द्रं मुनीन्द्रम् ॥१॥ कृत्याकृत्यं जिनमतवता-माततानाऽति शुद्ध्यै, लोकालोकप्रथितसुमति-र्योऽनवद्यप्रतापः। चरित्रातं विमतिसदनं दूरतः संजहार, सूरीशं तं हृदयकुहरे हेमचन्द्रं स्मरामि ॥ २॥ निर्विमानां परमशरणं संमृतो क्लेशराशौ, भव्यारामं कलिवनदवोत्तापिताना नराणाम् । तं देवदूं श्रुतिपथगतं क्षोणिपानामचिन्त्यं, सूरिं ध्याया-म्यहमनुदिनं हेमचन्द्र मुनीन्द्रम् ॥ ३॥ क्षोणीपालं जिनमतचिदं चक्रिवान्धर्मचक्री, शुद्धज्ञानाऽक्षुभितमनसं वीरकौमारपालम् । योविद्यानां सकल भुवने सिद्धिदानां प्रणेता, तं सूरीशं प्रमुदितमना हेमचन्द्रं स्मरामि ॥ ४ ॥ शास्त्रश्रेणी विविधविषयां यो वितेने विशालां, सच्चारित्रा-ण्यतिरसमया-न्यद्वितीयानि चक्रे । सिद्धान्तानां जिनततिकृता, पारदृश्वाऽवनौय-स्तं सूरीशं प्रमदमनसा हेमचन्द्रं भजामि ॥ ५॥ For Private And Personlige Only

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