Book Title: Apbhramsa Bharti 1995 07 Author(s): Kamalchand Sogani, Gyanchandra Khinduka, Gopichand Patni Publisher: Apbhramsa Sahitya Academy View full book textPage 4
________________ विषय-सूची लेखक क्र.सं. विषय प्रकाशकीय सम्पादकीय अपभ्रंश साहित्य का पुनरवलोकन डॉ. सकलदेव शर्मा 2. पउमचरिउ के कुछ विशिष्ट उत्प्रेक्षा अलंकार डॉ. रामबरन पाठक डॉ. श्रीरंजन सूरिदेव 3. 'णायकुमारचरिउ' में महाकवि पुष्पदन्त की सौन्दर्य-चेतना डॉ. त्रिलोकीनाथ ‘प्रेमी' 4. करकंडचरिउ : कथा-रूप और शिल्प 5. संदेश-रासक में प्रकृति-चित्रण डॉ. महावीरप्रसाद शर्मा 6. जहिं सुरवरतरुणंदणवणाइँ महाकवि पुष्पदन्त डॉ. शंभूनाथ पाण्डेय __ अपभ्रंश में संवेदना के नये स्तरों का अन्त:संधान और उनकी प्रासंगिकता तहिँ पुरवरु णामें कणयउरु महाकवि पुष्पदन्त सुश्री मंजु शुक्ल रासो साहित्य के आधुनिक अध्येता डॉ. विपिनबिहारी त्रिवेदी जोयइ व कमलसरलोयणेहिँ महाकवि पुष्पदन्त 11. जोइन्दु की कृतियों में बहिरात्मा का स्वरूप और सन्देश डॉ. (कु.) आराधना जैन 'स्वतंत्र' 12. On Early Apabhramsa Harivallabh C. Bhayani 91Page Navigation
1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 ... 110