Book Title: Anusandhan 2011 12 SrNo 57
Author(s): Shilchandrasuri
Publisher: Kalikal Sarvagya Shri Hemchandracharya Navam Janmashatabdi Smruti Sanskar Shikshannidhi Ahmedabad

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Page 122
________________ ११६ अनुसन्धान-५७ शब्दकोश'मां 'चिरमि' शब्द छे जेनो अर्थ 'चणोठी' त्यां आपेलो छे. स्तवनमां आ अर्थ संगत पण थाय छे. आथी चिरमठि = चणोठी नक्की थाय छे. मुनिश्री त्रैलोक्यमण्डनविजयजीनो शास्त्रीयविषय परनो अभ्यासलेख'दर्शन विशे विचारणा' एकाग्रतापूर्वक पठन माटे बाध्य करे छे. मुनिश्रीनी तात्त्विक विषय परनी पकड प्रशंसनीय छे. आवा गम्भीर लेखमां चर्चित विषयनो सार संक्षेप लेखना अन्ते आपवानी एक परिपाटी छे जे सामान्य वाचक माटे उपकारक छे. तर्को अने निष्कर्षोने संक्षिप्त रूपे तारवीने लेखना छेडे मूकवाथी चर्चित विषय वाचकना मनमां स्थिर थाय छे. मुनिश्रीने विनंति के आगामी लेखोमां आ परिपाटी अपनावे. जैन देरासर नानी खाखर-३७०४३५ जि. कच्छ, गुजरात

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