Book Title: Agam Suttani Satikam Part 07 Nayadhammkaha Aadi 5agams
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan
View full book text ________________
[9]
१३३
४ | ३२.
४७
અમારા સંપાદીત ૪૫ આગમોમાં આવતા મૂલ નો અંક તથા તેમાં સમાવિષ્ટ ગાથા क्रम __ आगमसूत्र | मूलं गाथा क्रम आगमसूत्र | मूलं | गाथा आचार | ५५२ १४७ | २४. | चतुःशरण
६३ | ६३ | सूत्रकृत
८०६ ७२३ | २५. आतुरप्रत्याख्यान ७१ | ७० |३. | स्थान १०१० १६९ | २६. महाप्रत्याख्यानं १४२ ४. | समवाय
३८३
| २७. भक्तपरिज्ञा १७२ | १७२ | भगवती
१०८७ ११४ | २८. तंदुलवैचारिक १६१ | १३९ ज्ञाताधर्मकथा २४१ ५७ | २९. संस्तारक
| १३३ उपासक दशा ७३ १३ । ३०. । गच्छाचार
१३७ १३७ अन्तकृद्दशा
६२ | ३१. गणिविद्या
८२ | अनुत्तरोपपातिक
देवेन्द्रस्तव
३०७ ३०७ १०. प्रश्नव्याकरण १४ | ३३. | मरणसमाधि
६६४
६६४ |११. विपाकश्रुत
| ३४. निशीष
१४२० | १२.| औपपातिक ७७ । ३० | ३५. | बृहत्कल्प । .२१५ १३.| राजप्रश्निय
८५ - | ३६. । व्यवहार
२८५ १४.] जीवाभिगम ३९८
९३ । ३७. । दशाश्रुतस्कन्ध ११४ १५. प्रज्ञापना ६२२ २३१ | ३८. | जीतकल्प
१०३ | १०३ १६. सूर्यप्रज्ञप्ति
२१४
१०३ | ३९. | महानिशीथ १५२८ | १७./ चन्द्रप्रज्ञप्ति २१८ १०७ ४०. आवश्यक
| २१ १८. जम्बूदीपप्रज्ञप्ति ३६५
ओघनियुक्ति ११६५ |११६५ १९. निरयावलिका
| ४१. पिण्डनियुक्ति ७१२ । ७१२ २०. | कल्पवतंसिका
| ४२. दशवैकालिक ५४० | ५१५ २१. पुष्पिता
११
४३. उत्तराध्ययन १७३१ २२. पुष्पचूलिका | १ | ४४. नन्दी
१६८ २३. वण्हिदशा
अनुयोगद्वार ३५० | १४१
४७
|
५६
९२
१३१
४१.
२१
w
नोध :- 651. गाथा संज्यानो समावेश मूलं मां 25 °४°१५छे. ते. मूल सिपायनी मस। गाथा सम४वी ना. मूल श६ मे अभी सूत्र भने गाथा बने भाटे नो मापेको संयुत अनुमछ. गाथा Mi०४ संपाहनोभ. सामान्य घरातोपाथीतेनी मला આપેલ છે. પણ સૂત્રના વિભાગ દરેક સંપાદકે ભિન્નભિન્ન રીતે કર્યા હોવાથી અમે સૂત્રાંક જુદો પાડતા નથી.
Jain Education International
For Private & Personal Use Only
www.jainelibrary.org
Loading... Page Navigation 1 ... 538 539 540 541 542 543 544 545 546 547 548