Book Title: Agam 01 Ayaro Angsutt 01 Moolam
Author(s): Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Agam Shrut Prakashan

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Page 112
________________ Shri Mahavir Jain Aradhana Kendra www.kobatirth.org Acharya Shri Kailassagarsuri Gyanmandir सुपछंधी - २, अज्झयणं - १२ १०३ दारियं परिवृत्तं मंडियालकियं निवुज्झामाणि देहाए एवं पुरिंसं वा वहाए नीणिश्रमाणं पेहाए अण्ण- यराई वा तहप्पगाराई विरूवरूवाई रुवाई चक्खुदंसण-पडियाए नो अभिसंधारेज्जा गमणा से भिक्खू वा भिक्खुणी वा अण्णदराई विख्यवाई महासवाई एवं जाणेज्जा तं जहाबहुगडाणि वा बहुरहाणि वा चहुमिलक्खाणे वा बहुपचंताणि वा अण्णयराई वा तहप्पगाराई विवस्त्रबाई महासवाई चक्खुदंसण- पचाए नो अभिसंधारेखा गणाए से भिक्खू वा भिक्खुणी वा अण्णवराई चिरूवरूबाई गहुस्सबाई एवं जाणेजा तं जहा इत्यीणि वा पुरिसाणि वाराणि वा इहराणि वा मज्झिमाणि वा आभरण-विभूसिवाणि वा गावंताणि वा बायंताणि बा नचंताणि वा हसंताणि वा रताणि वा मोहंताणि वा विउलं असणं पाणं खाइमं साइमं परिभुजताणि वा परि भाइताइणि वा विच्छड्डियमाणाणि वा विगोवयमाणाणि वा अण्णयराई वा तप्पगाराई विरु- बरूवाई महुस्सचाई चक्खुदंसण-पडियाए नो अभिसंधारेला गमणाए से भिक्खू वा भिक्खुणी वा नो इहलोइएहिंरूयेहिं नो परलोइएहिं रूवेहिं नो सुएहिं रूवेहिं नोअसएहिं रूवेहिं नो दिट्ठेहिं रूवेहि नो अदिट्ठेहिं रूवेहि णो इवेहिं रूवेहिं नो कंतेहि रूवेहिं सज्जेज्जा नो रज्जेज नो गिज्जा नी मुज्झेजा नो अज्झोववज्रेजा एवं खलु तस्स भिक्खु- स्स वा भिक्खु वा सामग्गिवं जं सव्वद्धेहिं समिए सहिए सया एज्जासि] - त्ति वेमि । ३९४ - 171 बारसमं अज्झयणं समत्तं-बीयाए चूलाए पंचमं सत्तिक थं सपत्तं तेरसमं अज्झयणं- परकिरियासत्तिक्कयं बीयाए चलाए छट्ठर्म सत्तिकयं T ( ५०६ ) परकिरिचं अज्झत्थियं संसेसिचंनो तं साइए नो तं नियमो से से परो पादाई आमज्जेज वा पमजेज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परो पादाई संवाहेज्ज वा पलिमद्देज वा -नो तं साइए नो तं नियमे से से परो पादाई फूमेज्ज वा रएज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परी पादाई तेल्लेण वा घरण वा बसाए वा मक्खेज्ज वा मिलिंगेज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परी पादाई लोद्धेण वा कक्केण वा चुष्णेण वा वण्णेण या उल्लोलेज वा उच्चलेज वा णो तं साइनो तं नियमे से से परो पादाई सीओदग-वियडेण वा उसिणोदग-वियडेण वा उच्छोलेज वा पधोएज वा नो तं साइए नो तं निवमे से से परो पादाई अण्णवरेण विलेवण-जाएण आलिपेज वा विलिपेज वा नो तं साइए नो तं निवमे से से परो पादाई अण्णयरेण धूवणजाएण धूवेज वा पधूवेन वा-नो तं साइए नो तं नियमे से से परो पादाओ खाणुं वा कंटयं वा नोहरेज वा विसोहेज्ज वा-नो तं साइए नो तं नियमे से से परो पादाओ पूयं बा सोणियं वा नीहरेज वा विसोहेज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परो कार्य आमजेज वा पमजेज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परो कार्य संवाहेन वा पलिमद्देज वा नो तं साइए नोतं नियमे से से परो कार्य तेल्लेण वा घएण वा बसाए वा मक्खेज वा अदमंगेज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परो कार्य लोण वा कक्केण वा चुण्गेण वा वण्णेण वा उल्लोलेज्ज या उब्वलेज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परो कायं सीओदग वियद्वेण वा उसिणोदग-बियडेण वा उच्छोलेज वा पहोएज- या नो तं साइए नो तं नियमे से से परो कार्य अण्णयरेणं विलेवण जाएणं आलिंपेन वा बिलिंपेज वा नो तं साइए नो तं नियमे से से परो कार्य अण्णयरेणं धूवण-जाएणं धूवेज वा For Private And Personal Use Only

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