Book Title: Adorshopadhyay arthat Sohanvijayji Maharaj ka Jivan Vruttant
Author(s): Hansraj Pt
Publisher: Atmanand Jain Sabha

View full book text
Previous | Next

Page 14
________________ सुकृपासे चित्तमें शान्ति होने लगी और इस कार्यमें धीरेधीरे सफलता प्राप्त होने लगी। श्री परम गुरुदेवकी आज्ञासे सं० १९८४ का चातुर्मास पालनपुरमें पंन्यासजी श्रीसुन्दरविजयजी महाराज तथा पंन्यासजी श्री उमंगविजयजी महाराजके साथ हुआ। इस चातुर्मासमें महानीशीथादि सूत्रोंके योगोद्वहनकी तपश्चर्या के साथ गुरु महाराजजी के जीवनचरित संबंधी अनेक घटनाओं का संग्रह करके अनुक्रमसे संकलन कर लिया। मैं ऐसे एक योग्य विद्वान की खोजमें था जो उनको सुधार कर सुचारु रूपसे जीवनचरित के रूपमें लिख दे । सं. १९८५ के ज्येष्ठ मास में पूज्यपाद परम गुरुदेव श्रीमद्विजयवल्लभसूरिजी महाराजने अपने शिष्य प्रशिष्यादि परिवार के साथ बंबई नगर को अलंकृत किया था । तब नगर-प्रवेश के शुभ महोत्सव पर पंजाबभर के लगभग सब मुख्य २ सद्गृहस्थ पधारे थे। इन के साथ श्रीयुत पंडित हंसराज शास्त्री भी थे। आप पर मेरी दृष्टि गई और समय पाकर मैंने पंडितजी से बातचीत की । श्रीमान् पंडितजीने भी इस कार्य को बड़े ही उत्साह से स्वीकार कर लिया। श्रीमान् पंडितजीकी विद्वत्ता और लेखनी के विषय में Shree Sudharmaswami Gyanbhandar-Umara, Surat www.umaragyanbhandar.com

Loading...

Page Navigation
1 ... 12 13 14 15 16 17 18 19 20 21 22 23 24 25 26 27 28 29 30 31 32 33 34 35 36 37 38 39 40 41 42 43 44 45 46 47 48 49 50 51 52 53 54 55 56 57 58 59 60 61 62 63 64 65 66 67 68 69 70 71 72 73 74 75 76 77 78 79 80 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 101 102 103 104 105 106 107 108 109 110 111 112 113 114 115 116 117 118 119 120 121 122 123 124 125 126 127 128 129 130 131 132 133 134 135 136 137 138 139 140 141 142 ... 254