Book Title: Aagam Sambandhi Saahitya 04 Aagam Sootr Laghu Bruhat Vishayanukram
Author(s): Anandsagarsuri, Dipratnasagar, Deepratnasagar
Publisher: Param Anand Shwe Mu Pu Jain Sangh Paldi Ahmedabad
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प्रत-अनुसार कुल-सूत्र कुल१०७
। दीप अनुक्र २१४ २१८ ३६५ ०२१
واه و
|
واه ؟
७८३
१६९
१००
१७८
१३१
०४
०२०
।
००२
००५
आगम-सूत्राणाम् प्रत-क्रमांक: एवं दीप-क्रमांक: आगम
प्रत-अनुसार आगम का नाम ।
दीप | आगम | आगम का नाम क्रम
कुल-सूत्र | कुल-गाथा | अनुक्रम | क्रम . आचार
४०२ | १४७ | ५५२ | १६ . सूर्यप्रज्ञप्ति ०२ . सूत्रकृत
०८२ ७२३ ८०६ १७. चन्द्रप्रज्ञप्ति ०३ . स्थान
७८३ १६९ १०१० १८. जंबूदवीपप्रज्ञप्ति |. समवाय
१६० ०९३ ३८३ १९ . निरयावलिका ०५ . भगवती
८६९ ११४ १०८७ २०. कल्पवतंसिका ०६ . ज्ञाताधर्मकथा
१६५
२४१ २१ - पुष्पिता ०७. उपासकदशा
०५८
०७३ २२ . पुष्पचूलिका ०८ . अंतकृद्दशा
०२७ ०१२ ०६२ २३. वृष्णिदशा ०९. अनुत्तरोपपातिकदशा ००६ ००२ ०१३ २४ . चतु:शरण १०. प्रश्नव्याकरण
०१४ ०४७ २५. आतुरप्रत्याख्यान ११ . विपाकश्रुत
०३४ ००३ ०४७ २६ . महाप्रत्याख्यान १२ . औपपातिक
०४३
२७. भक्तपरिज्ञा १३ . राजप्रश्नीय
०८५
०८५ | २८ . तंदलवैचारिक १४ . जीवाजीवाभिगम
२७३ ०९३ ३९८ २९ . संस्तारक १५ . प्रज्ञापना
| ३५२ | २३१ । ६२२ । ३० . गच्छाचार
००६
००२
०११
०५७ ०१३
००१
००३
००२
००५
००१ ०६३
०६३
०७१
وااه
१४२ १७२ १३९ १३३
१४२ १७२ १६१
१३३
१३७
१३७
• आगम-सूत्र ३४ से ३९ [छेदसूत्र- १ से ६] की वृत्ति को पूज्य आगमोद्धारकरीने संपादित नही किया, इसिलिए उन का समाविष्ट यहां नहि
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