________________ श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-३ // 1344 // 24 शतके उद्देशकः१ सूत्रम् 693 | असजिपर्यन्तोत्पादः कतिसु पुढवीसु उववजेज्जा?, गोयमा! एगाए रयणप्पभाए पुढवीए उवजा, 7 पज्जत्ताअसन्निपंचिं०जोणिए णं भंते! जे भविए रयणप्पभाए पुढवीए नेरइएसु उववजित्तए सेणं भंते! केवतिकालट्ठितीएसु उववज्जेज्जा?, गोयमा! जहन्नेणं दसवाससहस्सद्वितीएसु उक्कोसेणं पलिओवमस्स असंखेजइभागट्ठितीएसु उवजा 1, 8 ते णं भंते! जीवा एगसमएणं केवतिया उववजंति?, गोयमा! ज० एक्को वा दो वा तिन्नि वा, उ० संखेज्जा वा असंखेज्जा वा उव०२,९ तेसिणं भंते! जीवाणं सरीरगा किंसंघयणी पन्नत्ता?, गोयमा! छेवट्ठसंघयणी प०३, 10 तेसि णं भंते! जीवाणं केमहालिया सरीरोगाहणा प०?, गोयमा! ज० अंगुलस्स असंखेज्जइभाग, उ० जोयणसहस्सं 4,11 तेसिणं भंते! जीवाणं सरीरगा किंसंठिता प०?, गोयमा! हुंडसंठाणसंठिया प०५,१२ तेसिणं भंते! जीवाणं कति लेस्साओ प०?, गो०! तिन्नि लेस्साओ प० त० कण्हलेस्सा नीललेस्सा काउलेस्सा 6, 13 ते णं भंते! जीवा किं सम्मदिट्ठी मिच्छादिट्ठी सम्मामिच्छादिट्ठी?, गोयमा! णो सम्मदिट्ठी मिच्छादिट्ठीणो सम्मामिच्छादिट्ठी 7, 14 ते णं भंते! जीवा किंणाणी अन्नाणी?, गोयमा! णो णाणी अन्नाणी नियमा दुअन्नाणी तं० मइअन्नाणी य सुयअन्नाणी य 8-9, 15 ते णं भंते! जीवा किं मणजोगी वयजोगी कायजोगी?, गोयमा! णो मणजोगी वयजोगीवि कायजोगीवि 10,16 ते णं भंते! जीवा किं सागारोवउत्ता अणागारोवउत्ता?, गोयमा! सागारोवउत्तावि अणा०वि११, 17 तेसिणंभंते! जीवाणं कति सन्नाओ पन्नत्ताओ?, गोयमा! चत्तारि सन्ना पं० तं० आहारसन्ना भयसन्ना मेहुणसन्ना परिग्गहसन्ना 12, 18 तेसि णं भंते! जीवाणं कति कसाया प०?, गो०! चत्तारि कसाया प०, तं० कोहकसाए माणक० मायाक० लोभक० 13, 19 तेसि णं भंते! जीवाणं कति इंदिया प०?, गो०! पंचिदिया प० तं. सोइंदिए चक्खिंदिए जाव फासिंदिए 14, 20 तेसि णं भंते! जीवाणं कति समुग्घाया प०?, गो०! तओ समुग्धाया प०, तं० वेयणासमुग्घाए कसायस० मारणंतियस० 15, 21 ते णं भंते! जीवा किं सायावेयगा असायावे.?, गो०! सायावेयगावि // 1344 //