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________________ | श्रीभगवत्यङ्गं श्रीअभय वृत्तियुतम् भाग-२ // 865 // 11 शतके उद्देशक: शिवराजर्षिरधिकारः। सूत्रम् 418 | शिवराजर्षेविभङ्गेन सप्तद्वीपसमुद्रज्ञानप्ररूपणा च। श्रीगोतमस्य दीवा सत्त समुद्दा तेण परंवोच्छिन्ना दीवाय समुदाय, एवं संपेहेइ एवं० २त्ता आयावणभूमीओ पच्चोरुहइ आत्ता आगलवत्थनियत्थे जेणेव सए उडए ते. उवा० २त्ता सुबहुं लोहीलोहकडाहकडुच्छुयं जाव भंडगं किढिणसंकाइयं च गेण्हइ रत्ता जेणेव हत्थिणापुरे नगरे जे० तावसावसहे ते० उवागच्छइ उवा० रत्ता भंडनिक्खेवं करेइ रत्ता हत्थिणापुरे नगरे सिंघाडगतिगजावपहेसु बहुजणस्स एवमा० जाव एवं प०- अत्थिणं देवाणु०! ममं अतिसेसे नाणदंसणे समुप्पन्ने, एवं खलु अस्सिंलोए जाव दीवा य समुद्दा य, तएणं तस्स सिवस्स रायरिसिस्स अंतियं एयम€सोच्चा निसम्म हत्थिणापुरे नगरे सिंघाडगतिगजाव पहेसुबहुजणो अन्नमन्नस्स एवमाइक्खइ जाव परूवेइ- एवं खलु देवाणुप्पिया! सिवेरायरिसी एवं आइ० जाव प०- अत्थिणं देवाणु०! ममं अतिसेसे नाणदंसणे जाव तेण परंवोच्छिन्ना दीवा य समुद्दा य, ७से कहमेयं मन्ने एवं?।९ तेणं कालेणं 2 सामी समोसढे परिसा जाव पडिगया। तेणं कालेणं 2 समणस्स भगवओ महावीरस्स जेटे अंतेवासी जहा बितियसए नियंठुद्देसए (उ०५) जाव अडमाणे बहुजणसई निसामेइ बहुजणो अन्नमन्नस्स एवं आइ० एवं जाव प०- एवं खलु देवाणु०! सिवे रायरिसी एवं आइ० जाव प० अत्थि णं देवाणु०! तं चेव जाव वोच्छिन्ना दीवा समुद्दा य, से कहमेयं मन्ने एवं?, 10 तेएणं भगवं गोयमे बहुजणस्स अंतियं एयमढे सोच्चा निसम्म जाव सड्ढे जहा नियंठुद्देसए जाव तेण परं वोच्छिन्ना दीवा य समुद्दा य, से कहमेयं भंते! एवं? गोयमादि समणे भ० म० भगवं गो० एवं व०- जन्नं गोयमा! से बहुजणे अन्नमन्नस्स एवमातिक्खइतंचेव सव्वं भाणियव्वं जाव भंडनिक्खेवं करेति हत्थिणापुरे नगरे सिंघाडग० तंचेव जाव वोच्छिन्ना दीवा यसमुद्दा य, तएणं तस्स सिवस्स रायरिसिस्स अंतिए एयमढेसोच्चा निसम्मतं चेव सव्वं भाणियव्वं जावतेणं परं वोच्छिन्ना दीवा य समुद्दा य तण्णं मिच्छा, अहं पुण गोयमा! एवमाइक्खामि जाव परूवेमि- एवं खलु जंबुद्दीवादीया दीवा लवणादीया समुद्दा संठाणओ एगविहिविहाणा वित्थारओ अणेगविहिविहाणा एवं जहा जीवाभिगमे (जीवाभि० प्रति०३ उ०१ | प्रभारसख्यातद्वीपकथनश्रुत्वाऽज्ञाननाशदीक्षामोक्षादि। // 865 //
SR No.600444
Book TitleVyakhyapragnaptisutram Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages574
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_bhagwati
File Size15 MB
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