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________________ [1] वृत्तिकारमङ्गलम्। श्रीअनुयोगद्वारं मलधारि श्रीहेमचन्द्रसूरि वृत्तियुतम्। // 1 // / / अहम् // // श्रीमद्विजयरामचन्द्रसूरीश्वरस्मृति-ग्रन्थमाला-आगमाङ्कः-४५-ग्रन्थाङ्कः-३४ // // प्रथमतीर्थपति-श्रीआदिनाथस्वामिने नमः // ऐं नमः / / चरमतीर्थपति-श्रीमहावीरस्वामिने नमः॥ ॥पञ्चमगणधर-श्रीमत्सुधर्मस्वामिने नमः॥ // तपागच्छीय पूज्याचार्यदेव-श्रीमद्विजयदान-प्रेम-रामचन्द्रसूरीश्वरेभ्यो नमः॥ | स्थविरश्रीआर्यरक्षितविरचितं श्रीमन्मलधारिहेमचन्द्रसूरिसंहब्धवृत्तियुतं श्रीअनुयोगद्वारसूत्रम्। ऐं नमः / श्रीवीतरागाय नमः॥ सम्यक्सुरेन्द्रकृतसंस्तुति(त)पादपद्म-मुद्दामकामकरिराजकठोरसिंहम्। सद्धर्मदेशकवरं वरदं नतोऽस्मि, वीरं विशुद्धतरबोधनिधिं सुधीरम् // 1 // अनुयोगभृतां पादान् वन्दे श्रीगौतमादिसूरीणाम् / निष्कारणबन्धूनां विशेषतो धर्मदातॄणाम् // 2 // यस्याः प्रसादमतुलं सम्प्राप्य भवन्ति भव्यजननिवहाः। अनुयोगवेदिनस्तां प्रयत: श्रुतदेवतां वन्दे // 3 // 0 श्रीमद्गणधरप्रवरगौतमस्वामिवाचनानुगतं श्रीमन्मलधारीयहेमचन्द्रसूरिसदृब्धवृत्तियुतं' - इति मुद्रित प्रतौ। // 1 //
SR No.600442
Book TitleAnuyogdwar Sutram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorDivyakirtivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages450
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_anuyogdwar
File Size31 MB
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