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________________ श्रीसूत्रकृताङ्ग नियुक्तिश्रीशीला० वृत्तियुतम् श्रुतस्कन्धः 2 // 497 // श्रुतस्कन्धः 2 प्रथममध्ययनं पौण्डरीकम्, सूत्रम् 1-6 (636-641) वापीपुण्डरीकादि निरूपणम् पउमवरपोंडरीयं उन्निक्खिस्सामि, णो य खलु एयं पउमवरपोंडरीयं एवं उन्निक्लेयव्वं जहा णं एस पुरिसे मन्ने, अहमंसि पुरिसे खेयन्ने कुसले पंडिए वियत्ते मेहावी अबाले मग्गत्थे मग्गविऊमग्गस्स गतिपरक्कमण्णू अहमेयं पउमवरपोंडरीयं उन्निक्खिस्सामित्तिकट्ट इति वच्चा से पुरिसे अभिक्कमे तं पुक्खरिणिं, जावं जावं च णं अभिक्कमेइ तावं तावं च णं महंते उदए महंते सेए पहीणे तीरं अपत्ते पउमवरपोंडरीयंणो हव्वाए णो पाराए अंतरा पोक्खरिणीए सेयंसि णिसन्ने दोच्चे पुरिसजाते॥सूत्रम् 3 // ( // 638 // ) __ अहावरे तच्चे पुरिसजाते,अह पुरिसे पञ्चत्थिमाओ दिसाओ आगम्मतंपुक्खरिणिं तीसे पुक्खरिणीए तीरे ठिच्चा पासति तं एगं महं पउमवरपोंडरीयं अणुपुव्वुट्ठियं जाव पडिरूवं, ते तत्थ दोन्नि पुरिसजाते पासति पहीणे तीरं अपत्ते पउमवरपोंडरीयंणो हव्वाए णो पाराए जाव सेयंसि णिसन्ने, तएणं से पुरिसे एवं वयासी- अहोणं इमे पुरिसा अखेयन्ना अकुसला अपंडिया अवियत्ता अमेहावी बालाणो मग्गत्थाणो मग्गविऊणो मग्गस्स गतिपरक्कमण्णू, जंणं एते पुरिसा एवं मन्ने-अम्हे एतं पउमवरपोंडरीयं उण्णिक्खिस्सामो, नो य खलु एयं पउमवरपोंडरीयं एवं उन्निक्खेतव्वं जहा णं एए पुरिसा मन्ने, अहमंसि पुरिसे खेयन्ने कुसले पंडिए वियत्ते मेहावी अबाले मग्गत्थे मग्गविऊ मग्गस्स गतिपरक्कमण्णू अहमेयं पउमवरपोंडरीयं उन्निक्खिस्सामित्तिकट्ठ इति वुच्चा से पुरिसे अभिक्कमेतं पुक्खरिणिं जावं जावं च णं अभिक्कमे तावंतावंच णं महंते उदए महंते सेए जाव अंतरा पोक्खरिणीए सेयंसि णिसन्ने, तच्चे पुरिसजाए। सूत्रम् 4 // ( // 639 // ) ___ अहावरे चउत्थे पुरिसजाए, अह पुरिसे उत्तराओ दिसाओ आगम्मतं पुक्खरिणिं, तीसे पुक्खरिणीए तीरे ठिच्चा पासति तं महं एगं पउमवरपोंडरीयं अणुपुव्वुट्ठियं जाव पडिरूवं, ते तत्थ तिन्नि पुरिसजाते पासति पहीणे तीरं अपत्ते जाव सेयंसि णिसन्ने, तए णं से पुरिसे एवं वयासी-अहोणं इमे पुरिसा अखेयन्ना जावणो मग्गस्स गतिपरक्कमण्णूजण्णं एते पुरिसा एवं मन्ने-अम्हे एतं पउमवरपोंडरीयं // 497 //
SR No.600435
Book TitleSutrkritang Sutram Dwitiya Shrutskandh
Original Sutra AuthorN/A
AuthorPunyakiritivijay
PublisherShripalnagar Jain Shwetambar Murtipujak Derasar Trust
Publication Year2012
Total Pages328
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript & agam_sutrakritang
File Size24 MB
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