________________ अम्बड तृतीय आदेश: चरित्रम् प्रधानैर्ज्ञापितः पुत्रीस्वभावाकारकारकम् / राजा सन्मुखमागत्य दत्वा मानं तमानयत् // 17 // राजकन्यां निराबाधां कुरु त्वं सिद्धपौरुष ! / राज्ञेति कथिते सोऽपि नाटयेत् ध्यानमम्बडः // 18 // वासरत्रितयं यावत् सर्वलोकसमक्षतः / तत्र होमादिकं कत्तु प्रवृत्ताऽऽडम्बरेण सः // 16 // यतः-शत्रुषु व्यवहारेषु संसदि स्वसुरोकसि / आडम्बराणि(रेण) पूज्यन्ते स्त्रीषु राजकुलेषु च // 10 // तद्धापी जलपानेन मन्त्रसाधनपूर्वकम् / यथा रूपां व्यधात्कन्यां धन्यानां धन्य एव सः॥१॥ | इति लोकैः स्तुतः सोऽपि सामान्यो नैव कोऽप्यसौ / य एव राजकन्यायाः खरीरूपमपाकरोत् // 2 // राज्यार्द्ध राजकन्यां च रत्नमालासमन्विताम् / मुदा तस्मै ददौ राजा विवाहोत्सवपूर्वकम् // 3 // वैरोचनप्रधानस्य पुत्री राजलदेविका / अम्बडं सा वृणोति स्म सर्वं मिलति भाग्यतः // 4 // तत्र स्थित्वा कियत्कालं पत्नीदितयशोभितः / अम्बडः सर्वमापृच्छय क्षेमेण स्वपुरं ययौ // 5 // | पुरो गोरक्षयोगिन्या विज्ञप्य सकलश्रियः! एकादशप्रियायुक्तः सुखं भुङ्क्ते सदाम्बडः // 10 // // इतिश्री अम्बडचरिते गोरखयोगिनीदत्तस्तृतीयादेशः सम्पूर्णः // 3 // // 36 //