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________________ | गुरून् नत्वा प्रहर्षेण स्वगृहे स समागतः // तदादितो विशेषेण धर्मकार्यपरोऽजनि // 21 // गुरवोऽपि ततोऽन्यत्र विहरंति स्म भूतले // गुणायैकत्र साधूनां निवासो न यतः स्मृतः // 22 // नारीणां पितुरावासे नराणां श्वसुरालये // एकस्थाने यतीनां च वासो न श्रेयसे भवेत् // 23 // R // समणाणं सउणाणं भमरकुलाणं च गोउलाणं च // I अनिआउ वसहीउ सा वईआणं च मेहाणम् // | विना विहारं प्रतिबन्धभावो, न चोपकारो लघुता ममत्वम् / न देशभाषावगमो मुनीनां, रत्नत्रय _ स्यापि विराधना भवेत् // 24 // | विहार स्तेन साधूना मनन्तगुणप्राप्तये // उपकाराय लोकानां वर्णितोऽस्ति पुनः पुनः // 25 // श्रावकधर्म मेवं स सदयवत्सभूपतिः // प्रपाल्यांते समाराध्य कालेन स्वर्ग माप्तवान् // 26 // | आगामिन्यां क्रमान्मोक्ष मुत्सर्पिण्यां स यास्यति // मुनिराजवरैः प्रोक्तं सत्यं भवितु मर्हति // 27 // श्रीरत्नशेखरगुरुप्रवरप्रसादात्, हर्षादिवर्धनगणी सुरसैकपात्रम् // चक्रे कथां सदयवत्सकुमारसत्काम्, सत्पात्रदानविमलाभयदानरम्याम् // 28 // / रति सपात्रदाने च विमलाभयदानके / चरित्रमभवत्पूर्ण सदयवत्सभूपतेः // 29 //
SR No.600423
Book TitleSadaivvatsakumar Charitram
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMatisagar, Manishankar Chaganlal Shastri
PublisherRatilal Keshavlal
Publication Year1932
Total Pages196
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size15 MB
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