SearchBrowseAboutContactDonate
Page Preview
Page 69
Loading...
Download File
Download File
Page Text
________________ IFII III AIIATEII AISHII II न च सा प्रहरादुर्ध्व संप्राप्तापि फलप्रदा / यतः कीलनविद्येयं मध्याह्ने प्राणहारिणी // 32 / / तदेतदधुनाऽस्माकं सानिध्य कः करिष्यति / परार्थेन यतः पृथ्व्यां कोऽपि क्लेशसहः पुमान् // 33 // इदं संप्रति संप्राप्तं त्रयाणां मरणं ध्रुवम् / अयमित्थं प्रभुस्तावत मृत्युमाफ्यति निश्चितम् // 34 // आचार्य च विपन्नेऽस्मिन् ममानशनमेव हि / अग्रे च गुरुणा साकं मृत्युरङ्गीकृतो मया // 35 // हा हन्त ! राजपुत्रीयं रक्षिताऽपि न रक्षिता / विमुश्चति यतःप्राणान् गुरुमृत्यौ मनस्विनी // 36 // इति तस्य वचः श्रुत्वा शोकार्तस्य तपस्विनः / नलस्तं निःश्वसन्नूचे परदुःखेन दुःखितः // 37 // तपस्विन् ! राजपुत्रोऽहं लक्षणानि च तानि मे।न चास्ति निबिडक्रुद्धात् कृतान्तादपि मे भयम् // 38 // किन्तु वाहनमेतन्मे समर्थमपि सर्वथा। प्रहरात पुण्डरीकाद्रौ यातायातक्षमं न हि // 39 // अयं च भगवान् क्षीणो न कालहरणं क्षमः / असमर्थ परार्थेषु धिग् मां मिथ्याभिमानिनम् // 40 // ततः प्रमुदितःप्रोचे मुनिशिष्यो नृपात्मजम् / हन्त ! सिद्धानि कार्याणि कुमार! त्वयि संमुखे // 41 // प्रसादात् पूज्यपादानां यन्ममास्ति सुशिक्षितः / बलातिबलयोर्भेदो मन्त्रोऽश्वहृदयाभिधः // 42 // मन्त्रं पठितसिद्धं मे गृहाण पुरुषर्षभ ! / यत्प्रभावेण जायन्ते सपक्षा इव वाजिनः // 43 // न किञ्चिद् दूरमासन्नं शीतमुष्णं क्षुधं तृपम् / न च भूमिमभूमि वा जानन्ति ययवो यतः // 44 // तत्सङ्क्रान्तमिमं वाहमारुह्य ब्रजतस्तव / द्वियोजनशतान्तेऽपि पुण्डरीकाचलः पुरः // 45 //
SR No.600422
Book TitleNalayanam
Original Sutra AuthorN/A
AuthorManikyadevsuri
PublisherZZZ Unknown
Publication Year
Total Pages398
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size24 MB
Copyright © Jain Education International. All rights reserved. | Privacy Policy