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________________ जइ पुण मज्झ पइन्ना इमिणावि ण पूरिया अहन्नाए / ताहं विहिअपइन्ना सवेरिणी चेव संजाया // 787 // उबझायाएसेणं तेहिं कुमारेईि दसियं जाव।। वीणाए कुसलतं ताव कुमारीवि दंसेइ // 788 // तीए कुमरिकलाए संकुडियं सयलरायकुमराणं / वीणाए कुसलत्तं चंदकलाइ व्ब कमलवणं // 789 // का कृतं पुण्यं येन स तं, कीदृशी अहं ?- पूर्णा प्रतिज्ञा यस्याः सा पूर्णप्रतिज्ञा // 786 // यदि पुनरनेन पुरुषे| णापि अधन्याया-अपुण्यवत्या मम प्रतिज्ञा न पूरिता तत्-तर्हि विहिता-कृता प्रतिज्ञा यया सा ईदृशी अहं स्ववैरिणी एव समाता // 787 // तत उपाध्यायस्यादेशेन-आज्ञया तैः कुमारैर्यावद्वीणायां- वीणावादने कुशलत्वं-निपुणत्वं दर्शितं तावत्कुमारो अपि दर्शयति, निजवीणावादनविज्ञानमिति शेषः॥७८८ // तया कुमार्याः कलया सकलराजकुमाराणां वीणावादने कुशलवं सङ्कचितं-मुद्रितमित्यर्थः, कया किमिव ?-चन्द्रकलया कमलवनमिव, यथा तया तत्सडुचति तथेत्यर्थः॥ 789 // ७८७-७८८-स्पष्टे / ७८९-चन्द्रकलया कमलावनमिव कुमारी कलया कुमार कुलं संकुचितमित्युपमालकारः /
SR No.600404
Book TitleSirisiriwal Kaha Part 02
Original Sutra AuthorN/A
AuthorRatnashekharsuri, Bhanuchandravijay
PublisherYashendu Prakashan
Publication Year1963
Total Pages250
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size13 MB
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