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________________ // 53 // रहस्यभेदो| परि काकजंघ कथा नरहस्यानां बहूनां श्रूयते क्षयः // 54 // / तथाहि-प्रियया भिन्नरहस्यः क्षोणिजय्यपि / काकजंघनृपो दुःखमिहैवाऽन्वभूच्चिरम् // 55 // देशेऽस्ति कङ्किणेवार्द्धस्तटे सोपारकं पुरम् / नैकैः सांयात्रिकैः सेव्यं यत्तीर्थ यात्रिकैरिव // 56 // रथकारोऽवसत्तत्र विश्वकर्मेव मूर्तिमान् / कोकासो नाम तद्दास्याः | सूनुश्चासीद् द्विजातिजः // 57 // शिक्षयत्यात्मजान्नानाशिल्पानि रथकृत्स्वयम् / अनेडमूकवत्तस्थौ कोकासस्तु तदन्तिके // 58 // | सोऽगृहीत तानि सर्वाणि पटुधीविक्षितान्यपि / रथकृत्सूनवस्त्वज्ञाः किमप्यज्ञासिषुन हि // 59 // रथकारे मृते राजा दासेरं तत्पदे न्यधात् / आदित्येऽस्तंगते दीपमिव लोको गुणाधिकम् / / 60 // इतोऽवन्त्यां तदा पुर्यां नृपोऽभूत् परमार्हतः। चत्वारः सेवकाः श्राद्धास्तस्य चासन पृथकलाः॥६१।। सूपकारवदत्रेकः पचत्यन्नं तथा यथा / जीयत्येतद्भुक्तमात्रमथवा याममात्रतः॥६२॥ क्रमात् द्वित्रिचतुःपञ्चयामतो वा तदिच्छया। सर्वथा वा न वाजीर्यत्याः स्वयंभूः सतां कला // 63 // युग्मम् / / अभ्यङ्गं कुरुतेऽन्यस्तु तैलस्य कुडवं तनौ / सुखं प्रवेशयन्निःकाशयेच कलया स्वया // 64 // तृतीयः कुरुते शय्यां तथा येन प्रबुध्यते / आये यामे द्वित्रितुर्येषु वा स्वपिति | वा नृपः // 65 // चतुर्थः श्रीगृहाध्यक्षः कला तस्येयमद्धता / यया तत्र प्रविष्टोऽन्यो न किमप्यवलोकते // 66 / / अवन्तीशोऽप्यपुत्र-| त्वाद् विषयेषु विरक्तधीः / आसीजिघृक्षुः प्रव्रज्या राजकार्येष्वनादरः // 67 // इतः पाटलिपुत्रेशो जितशत्रुरवेष्टयत् / अवन्ती दुर्धरैः | सेन्यैः पृथ्वीं वाद्धिजलैरिव / / 68 // दैवयोगात्तदाऽवन्तीपतिः शूलरुजाकुलः / प्रपद्याऽनशनं भेजे सुरसद्म समाधिना 69 // अनाथा | पाटलिपुत्राधिपस्यैवाऽपिता पुरी / पौरैर्नृपण ते श्राद्धाश्चत्वारोऽप्यथ शब्दिताः // 70 // आयातांस्तानऽसौ पृष्ट्वाऽऽदिक्षत्स्वे स्वे पदे hol ततः / कोशाधिकारिणां कोशं दर्शितं रिक्तमैक्षत // 71 // शय्यापालः पुनः शय्यां राज्ञश्चक्रे तथा यथा / स रात्रौ प्रतिमुहूर्तमुदति // 53 //
SR No.600399
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1942
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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