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________________ श्रीअमम // 244 // जिनचरित्रम् त्यक्त्वा दमयन्ती नलस्य गमनम् प्रीत्या च कीर्त्या च संव्यानाद्धं चकर्त्त सः॥९॥ च० क० // भैम्या वस्त्रांचले श्वेते चाक्षराणि निजसृजा / इत्यलेखीदिमां | | स्वाभिप्राय ज्ञापयितुं नृपः // 10 // प्रिये ! सहिष्टाः कष्टं मा ऽनुलग्ना मम दुर्मतेः। यद्भ्रष्टराज्यो राजाऽपि रंकादप्यधिको जने // 11 // न्यग्रोधदक्षिणेनाध्या दक्षिणे याति कुंडिनम् / वामे वामः पुनस्तस्मात् कोशलानगरी प्रति // 12 // त्वं यायाः कुंडिनं मा गाः कुशले ! कोशलां यतः।प्रोषितप्रेयसां स्त्रीणां पित्रोः पार्थे स्थितिः शुभा // 13 // कस्याप्यहं तु नैव स्वं मुखं दर्शयितुं क्षमः। आवयोः समये | क्वापि पुनर्दर्शनमस्तु तत् // 14 // अथ देव्याः स्वापबोधौ निश्चेतुं पाणिना मुखम् / स्पृष्ट्वा सोऽचिंतयन् काचित्कातिरुज्रभते दृशोः // 15 // यया जागतिं शेते वा प्रियेयमिति मे मनः / न निश्चेतुमलं धिग्मामभाग्यं त्यक्तुमुद्यतम् // 16 // हतु तदृष्टितो दृष्टिं नाश| कद्रलवन्नलः। तत्प्रबोधभयाच्चाश्रुसलिलं पाणिना दधौ // 17 // निःस्नेहः स्निग्धहृदये ! दुःशीलः शीलशालिनि ! / अद्रष्टव्यमुखस्तेऽन्त्यां क्षमणां कुरुते नलः // 18 // उक्त्वेत्युत्थाय निःशब्दं रुदंश्छन्नतरैः पदैः / गन्तुं प्रववृते तस्मात्स्थानाच्चौर इवाग्रतः // 19 // दुमानाऽऽपृच्छय स प्रोचेऽनार्य भो मा म वित्त माम् / दैवाधीनः श्रियाहीनः प्रियां वः शरणेऽमुचम् // 20 // पुनर्वलित्वाऽसौ दध्यौ यामस्पाक्षीत्पुरा गृहे / नानिलोऽपि नलान्मन्ये विभ्यत्सेयं हहा प्रिया // 21 // भिक्षाचरीव वत्क्षामा बने जीणेकवस्त्रभृत / अशरण्या क्षितौ शेते धिग्मां कीबशिरोमणिम् // 22 // युग्मम् // आत्मैकशरणां चैतां भर्तृजाल्मस्य मे बने / युज्यन्ते शरणीकर्ते त्यजतो वनदेवताः॥२३॥ ऊचेऽथ प्रांजलिर्देव्यः प्रार्थयेऽहं वनाश्रयाः / वातव्येयं सती प्रातः प्राप्या कुंडिनवर्त्म च // 24 // प्रिया भासस्य मे देवि स्वाप्रश्नोस्त्विति मुद्रितम् / वदस्तावनलोऽयासीद्यावत्साऽगाददृश्यताम् // 25 // मार्गे गच्छन् रुदन मंदं स दध्यौ Hदयो चेदने निशि / एतां सुप्तां श्वापदः कोऽप्यद्यात्तत्का गतिर्भवेत् // 26 // ब्रह्मास्त्रमपि चैतस्याः स्यान्निद्राहतशक्तिकम् / प्रभौ जाग्रति | सर्ग-६ // 24 //
SR No.600399
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1942
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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