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________________ | चरित्रम् श्रीश्रमम-* समंतान्नास्ति सौधेऽत्र वेषधारीपरावृते / द्रष्टुं नृपसुतामेकामेकान्तो भावि तत्किमु॥४०॥ इत्यस्य ध्यायतः काचिद् यक्षद्वाराध्वना जिनतदा / आगादास्यपि देवीव दिव्यालंकारधारिणी // 41 // युग्मम् // सा पृष्टाऽऽख्यद्वेत्रिणीभिः संप्रत्यारामसौधगा / आस्ते कनकव॥२१४॥ त्येका देवीदेवपरिच्छदा // 42 // श्रुत्वेति वृष्णिमरेत्य यक्षद्वाराध्वनैव तम् / प्रांशुवनं सप्तभूमं प्रासादमधिरुढवान् // 43 // कपोलद्व- दुन्दुदर्शने यलावण्यलिप्पयेव द्विमूर्तिना / इन्दुनाप्याश्रितमिन्दपलकुंडलकैतवात् // 44 // आराध्यमानां ताराभिरिव हारावलिच्छलात् / वाचस्प कनकवत्याः तीर्ण्यया लब्धं वाग्वैभवमिवाद्भुतम् // 45 // अलभ्यतनुसौरभ्यलुभ्यद्भिरिव तैः समम् / उपास्यमानामृतुभिः पुष्पाभरणकैतवात् // 46 // प्रमोदक्री डा, दौत्यवर्णमाणिक्यशैलाभ्यां सूक्ष्मीभूयेव देहजाम् / लक्ष्मी भूपापदेशेनाऽभ्यर्थ्यमानां समंततः॥४७॥ स्त्रीरुपसृष्टेरवधिं भद्रासनमधिष्ठि कर्मनिवेदने ताम् / निध्यायन्ती पटेऽभीष्ट खेचरीमिव दैवतम् // 48 // उपसर्पन्सरोजाक्षीमद्राक्षीत्तां यद्वहः / यथाश्रुतां श्रीकनकवती देवी नवा- स्वनिश्चय मिव // 49 // स० कु०॥ साक्षाचित्रपटस्थं च सा दशाह सुलोचना / मुहुर्वीक्ष्य विनिश्चित्येष्टागमं मुमुदेतराम् // 50 // हाश्रुभि-19 कथनं च नेत्रशुक्तिमुक्तैर्मुक्ताफलैरिव / दत्वाचं स्वागतं पृष्ट्वा चलत्कंकणनिस्वनैः ॥५शाबभापे प्रांजलिः पुण्यैरगण्यम पुरातनैः / अथैव फलितं | यस्त्वमानीतोऽस्यत्र सुंदर! // 52 // युग्मम् // अमंदानंदभारेण मन्ये सा विनमत्तनुः / वसुदेवमुपास्त प्रणन्तुं च ससंभ्रमम् // 53 // | तां दशाहः प्रणामा)ऽप्यालप्यैवं न्यवारयत् / ख मे भृत्यस्य नम्यासि स्वामिपत्नीतिवणिनि ! // 54 // साध्वोचचा विना कोऽन्यः सर्ग-६ स्वामी यस्यास्मि पत्न्यहम् / नर्मणा तदलं नाथ किमुन्माथं करोपि मे // 55 // स्वामी त्वमेव मे त्वां च देवताऽऽख्यत् ततोऽस्मि ते / दास्यहं देववत् त्वां च ध्यायन्त्यस्मिन् पटे स्थितम् // 56 / / शौरिरुचे विदग्धाऽपि ख मुग्धावद् ब्रवीपि किं ? / यस्ते देवतया 19 // 214 // ख्यातः स पतिः श्रूयतां त्वया // 57 // सौधर्माधिपतेलोकपालः पुण्यजनाग्रणीः / भस्तेि उत्तराशायाः साम्प्रतं भविता नु ते P
SR No.600399
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1942
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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