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________________ // 169 // राज्याप्ती नमुचे वैरनिर्यात नार्थ प्रयत्नः पद्मोत्तराद्यैः सह साधुभिः // 98 // प्रतिस्थानं नवैश्चैत्यैश्चक्री मां मण्डन्नयम् / स्ववंशस्येव जैनस्य शासनस्योन्नति व्यधात् // 19 // 3 श्रीपद्मोत्तरराजर्षिः पालयिखोत्तमं व्रतम् / सञ्जातकेवलज्ञानः सिद्धिसौख्यमथाऽसदत् // 300 // जक्षुर्विष्णुकुमारस्य प्रभावात्तपसोऽद्भुताः / लब्धयो वायुविक्षोभान्महोर्मय इवाम्बुधेः॥१॥ महान्मेरुरिवाऽत्यन्तं सूक्ष्मश्च परमा| णुवत / तार्थ्यवद् व्योमसञ्चारी कामरूपी च देववत् // 2 // इत्याद्यनेकरूपोऽसौ भवितुं शक्तिमानऽभूत / स्वतपोव्ययभीरुस्तु न लब्धीः सोऽपदेऽव्ययीत् // 3 // स एव सुव्रताचार्यों बहुसाधुवृतोऽन्यदा। हस्तिनापुरमेत्याऽस्थाद् ज्येष्ठकल्पचिकीर्षया // 4 // ज्ञात्वा | तदागम मंत्री नमुचिश्चक्रवत्तिनम् / निर्यातनाय प्राग्वैरस्येति पद्ममवोचत / / 5 / / यौवराज्ये प्रतिपन्न स्वामिन् ! देहि वरं मम / न्यस्त | युगान्तेऽप्यऽक्षय्यं सत्पात्रे वस्तुबद्वचः // 6 // स राज्ञा मार्गयेत्युक्तोऽवादीद्यज्ञं यियक्षतः / राज्यं मे देहि तत्प्रान्तं यावत्स्मृत्वा * खजल्पितम् // 7 // सत्यवादी महापद्मो राज्यं नमुचये ददौ / स्वयमन्तःपुरं गत्वा तस्थौ योगीव निःक्रियः // 8 // सत्त्वोत्कटमपि | स्वच्छं चित्त वारीव भूभुजाम् / यां दिशं नीयते धृत॑स्तया संचरते ध्रुवम् // 9 // खभावसरलान् पक्षोज्वलानपि शरानिव / नरान् कोदण्डयद् वक्रश्यावयेद् गुणतः खलः // 10 // दुर्ध्यायी नमुचिर्मायी बकवनगराद् बहिः / निर्गत्य दिक्षितो जज्ञे यज्ञवाटेऽथ कैत* वात् // 1 / / एत्याभिषेककल्याणं तस्य प्रकृतयोऽखिलाः / श्वेताम्बरान् विना सर्वे दर्शनस्थाश्च चक्रिरे // 12 // एयुर्दशनिनो द्रष्टुं * मामन्ये नत्वमी इति / नमुचिः श्वेतभिक्षूणां क्षुण्णमग्रेऽकरोत्खलः // 13 // स गत्वा सुव्रताचार्यान् द्विजराजबुवोऽब्रवीत् / इत्याक्षि| पन्नरे लोकव्यवहारबहिर्मुखाः // 14 // तपोवनानि क्ष्मापालरक्ष्याण्येवेति नीतितः। कार्य तपोधन राज्ञोऽभिषेकेऽभ्येत्य मंगलम् // 15 // | तपाषष्टांशदानेनावर्जनीयश्च सान्वहम् / भवद्भिर्विदधे नैतद्विरुद्धर्मयि निश्चितम् // 16 // युग्मम् // युष्माभिर्मम राज्ये तन्न स्थेयं यात // 169 //
SR No.600399
Book TitleBhavi Jineshwar Amamswami Charitra Mahakavya Part 01
Original Sutra AuthorN/A
AuthorMuniratnasuri, Vijaykumudsuri
PublisherManivijay Ganivar Granthmala
Publication Year1942
Total Pages306
LanguageSanskrit
ClassificationManuscript
File Size28 MB
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