________________ श्रीअमम // 14 // | द्रुमा इवाभवन् // 54 // समुद्रविजयोऽक्षोभ्यः स्तिमितः सागरोऽपि च / हिमवानऽचलश्चाथ धरणश्च पूर्णोऽपि च // 55 // अभिचन्द्रो * जिन| वसुदेवो दशाहत्वेन विश्रुताः / कुन्ती मद्री च तनये स्वकुलव्योमचन्द्रिके // 56 // व्यवाहयत् पिता कुन्ती पाण्डुना हस्तिनापुरे। चरित्रम् दमघोपेण चैद्येन माहिष्मत्यां च मद्रिकाम् // 57 // अथाऽन्यदाऽवधिज्ञानी सुप्रतिष्ठो महामुनिः / आगात् शौरिपुरोद्याने विश्वस्यो- सुप्रतिष्ठपचिकीर्षया // 58 // विदित्वोद्यानपालेभ्यस्तदागमनमङ्गलम् / वन्दितुं सपरीवारो ययावन्धकवृष्णिराट् // 59 / / पितृपैतामहं दीक्षागुरुं | नमुनिकथितो तं मुनिमादरात् / नत्वा प्रदक्षिणापूर्व पुरो भुवि निपेदिवान् // 60 // ततः सर्वज्ञवागर्थसारसंग्रहकारिकाम् / काराकाराच संसारात् / वसुदेव पूर्वभवः प्राणिनां मुक्तिकारिकाम् // 61 // शमसंवेगवैराग्यनिर्वेदरसदीधिकाम् / देशनामशृणोत्तस्मात् सन्देहध्वान्तदीपिकाम् // 62 // लब्ध्वावसरमप्राक्षीन्मुनिमन्धकवृष्णिराट् / लोकोत्तरगुणाः सर्वे सूनवो भगवन् मम॥६३।। परं सौभाग्यसौरूप्यकलाकौशलविक्रमैः / दुन्दुरेष | कुतो हेतोरतिशेते जगन्त्यपि // 64 // दत्त्वोपयोगमववेमुनिरानकदुन्दुभेः / आख्यात् प्राक्कर्मणां पाकं गुणाधिक्यनिवन्धनम् // 65 / / जम्बूद्वीपेऽस्ति भरते मध्ये मगधमण्डलम् / नन्दिग्रामो भूरिलक्ष्मीर्भुवः श्रवणकुण्डलम् // 66 // दारिद्यसिद्धाञ्जनयुक् सोमो नामा | ऽभवद् द्विजः। अनेकलोकद्रष्टापि यो न केनापि वीक्ष्यते // 67 // यं नवं विदधे वेधाः शंके व्यञ्जनमस्वरम् / प्रबुद्धोपि परं वर्ण |तं न कोप्यनयद् यतः // 68 // विश्वैकफलके क्रीडन् भवितव्यतया सह / सौरैः शून्यं विधिश्चके यद्गृहं घृतकारवत // 69 // सोमिले सर्ग-४ त्यभवत् भार्या तस्य मूर्तेव दुःस्थता / नन्दिपेणस्तयोर्सनुरऽभून्निःपुण्यकाग्रणीः // 70 // तस्मिन् गतेऽपि गर्भान्तः पिता मृत्युमुखं ययौ / जातमात्रे तु मातापि नाऽतापि क इवाशुभैः // 71 // मातृजामिरगृहाच्च जामेयप्रेमतोऽथ तम् / ममार सापि शाखा हि // 14 // शुष्यत्येव कपोतयुक् // 72 // शिरःप्रभृतिपादान्तसवियववर्तिना / वैरुप्येण स निन्द्योऽभूत् श्वित्रेणेवानिवत्तिना // 73 // अभाग्य